
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की ओर से शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के लिए बनाए गए भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के बाद सरकार से जवाब तलब किया है।
प्रार्थी देस राज और अन्य की दायर याचिका के अनुसार उन्होंने वर्ष 2007 से वर्ष 2009 तक प्रदेश के विभिन्न वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटरों से शारीरिक शिक्षक का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उस समय शिक्षा विभाग ने शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के लिए बनाए गए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार मैट्रिक पास होने के साथ-साथ एक वर्षीय शारीरिक शिक्षक का डिप्लोमा होना अनिवार्य योग्यता रखी थी। लेकिन वर्ष 2011 में सरकार ने इन नियमों में परिवर्तन कर जमा दो में 50 प्रतिशत अंक और शारीरिक शिक्षक का दो वर्ष का डिप्लोमा अनिवार्य योग्यता रख दी। इस बदलाव से प्रदेश के करीब 7000 प्रशिक्षण प्राप्त शारीरिक शिक्षक भर्ती के लिए अयोग्य हो गए।
प्रार्थियों ने अदालत से गुहार लगाई कि इन नियमों को उन डिप्लोमा धारकों पर न थोपा जाए जिन्होंने मैट्रिक पास कर एक वर्षीय शारीरिक शिक्षक का डिप्लोमा किया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड ने 3 जून 2011 को 50 शारीरिक शिक्षक की भर्ती हेतु पुराने और नए नियमों के तहत अभ्यर्थियों को योग्य माना, परंतु 15 सितंबर 2012 को जारी विज्ञापन में 39 पदों के लिए तथा 20 मई 2013 को जारी विज्ञापन में 44 पदों की भर्ती हेतु पुराने नियमों को दरकिनार कर दिया और मैट्रिक के साथ एक वर्षीय डिप्लोमा करने वालों को आवेदन का मौका ही नहीं मिला। प्रार्थी ने अदालत से गुहार लगाई है कि कम से कम वर्ष 2011 से पहले के शारीरिक शिक्षकों की भर्तियां पुराने नियमों से ही की जाएं।
