
अल्मोड़ा। आंदोलनरत जल संस्थान के पीटीसी कर्मचारियों ने अप्रैल से लंबित मानदेय भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को नगर में जुलूस निकाला और कलक्ट्रेट प्रांगण में धरना दिया। इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि विभाग पेयजल योजनाओं को स्वैप मोड में देने की बात कहकर पीटीसी कर्मचारियों को मानदेय नहीं दे रहा है। उन्होंने इसका विरोध किया।
पीटीसी कर्मी बिष्टाकूड़ा में जल संस्थान ईई कार्यालय में एकत्र हुए। नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट तक जुलूस लेकर पहुंचे और धरना दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि पीटीसी कर्मी पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं के रखरखाव का कार्य करते हैं। कर्मचारियों को एकल और बहु योजनाओं के नाम पर क्रमश: 1250, 1350, 1500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो कि वर्तमान महंगाई में अपर्याप्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल से विभाग द्वारा योजनाओं को स्वैप मोड में देने की बात कहकर पीटीसी कर्मियों को मानदेय से वंचित कर दिया गया है, जबकि वास्तव में योजनाएं स्वैप मोड में हस्तगत नहीं हुई हैं। स्वैप के नाम पर पीटीसी कर्मियों की सेवाओं समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाएं पीटीसी कर्मचारियों के साथ हस्तगत होती हैं। जिन पीटीसी कर्मियों को हस्तांतरित करने की बात विभाग कर रहा है वह बहुल ग्राम पेयजल योजना में कार्यरत हैं। योजनाओं में मार्च तक विभाग ने राजस्व भी वसूला है। विभाग द्वारा मात्र तोक की योजनाएं स्वैप में दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई से कर्मचारी धरने पर बैठे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला है अब आंदोलन और तेज होगा। प्रदर्शन में किशन सिंह भंडारी, हंसादत्त पांडे, सुशील चंद्र जोशी, शिवराज सिंह नेगी, लछम सिंह, कृष्ण राम, शंकर लाल, नंदाबल्लभ जोशी, दीवान सिंह, मोहन चंद्र पांडे, शंकरदत्त, नंदन सिंह आदि ने भाग लिया। बाद में मांगों को लेकर पेयजल मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया।
