
शिमला। बिलासपुर जेल की तर्ज पर अब प्रदेश की छह जेलों में ओपन एयर बैरक बनाने का फैसला लिया गया है। इस सुविधा का फायदा उन्हीं कैदियों को मिलेगा जिनका व्यवहार अच्छा होगा। ओपन बैरक में रहने वाले कैदियों को जेल से बाहर काम करने का मौका भी मिलेगा। ये कैदी सुबह काम के लिए बाहर जाएंगे और शाम को वापस जेल लौट आएंगे। इनकी कमाई का 85 प्रतिशत हिस्सा सीधे इनकी जेब में जाएगा जबकि 15 प्रतिशत राशि जेल वेलफेयर फंड में जमा होगी, जो कैदियों की भलाई के लिए खर्च होगी। कैदी अपने पैसे को परिजनों पर खर्च कर सकता है।
प्रारंभिक स्तर पर छह जेलों में बैरक बनेंगे। इनमें धर्मशाला, सोलन, मंडी, नाहन, कैथू और चंबा जिला की जेलों को चुना गया है। धर्मशाला में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। जेल मैनुअल के अनुसार ओपन बैरक में वही कैदी रहेंगे जिनका व्यवहार अच्छा होगा। कैदियों में सुधार के मद्देनजर जेल विभाग ने यह कदम उठाया है।
सराहनीय प्रयास, बंदियों में आएगा सुधार
जेल विभाग का यह प्रयास सराहनीय है। इससे जेल में कैद बंदियों को सुधरने के और बेहतर मौके मिलेंगे। इसके अलावा अन्य बंदियों को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा। इनमें भी सुधार की उतनी ही गुंजाइश होती है जितनी कि एक आम व्यक्ति में रहती है। जरूरत होती है एक मौका देेने की और इनके प्रति नजरिया बदलने की, जो विभाग कर रहा है।
-सरोज वशिष्ठ, जेल सुधार कार्यक्रमों के लिए मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता
ताकि मुख्य धारा से जुड़ सकें कैदी
जेल में जिन कैदियों का व्यवहार अच्छा है उन्हें इन बैरक में रखा जाएगा। इन्हें जेल से बाहर जाकर काम करने की छूट होगी। जिनके हाथों में जैसा हुनर होगा उन्हें वैसा ही कार्य दिया जाएगा। जेल से छूटने के बाद वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें, यह प्रशासन का प्रयास रहता है।
-एसआर मरडी, एडीजीपी जेल
