मिंजर मेले के प्रति कम हुई लोगों की रुचि

चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले के प्रति लोगाें का उत्साह और दिलचस्पी साल दर साल कम होती जा रही है। इससे मिंजर मेले का वजूद खतरे की कगार पर है। एक ओर जहां युवा पीढ़ी इस प्राचीन संस्कृति को संजोए रखने से अपना मुंह फेर रही है वहीं बुजुर्ग लोग भी अब मिंजर मेले के प्रति कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे यह मेला दिन प्रतिदिन अपनी पहचान खोता चला जा रहा है। मिंजर मेले के शुभारंभ पर नगर परिषद की ओर से निकाली गई शोभायात्रा पर चंद लोगों ने ही हिस्सा लिया। इससे शोभायात्रा नाम तक की रह गई है।
हालांकि नगर परिषद की ओर से चंबा के 200 के करीब पंचायत प्रतिनिधियों व अन्य संस्थाओं के लोगों को निमंत्रण पत्र भेजे थे। इसके बावजूद किसी ने भी इस शोभायात्रा में हिस्सा लेने की जहमत नहीं उठाई। बताया जा रहा है कि अब इस त्योहार पर राजनीति हावी हो चुकी है। यहां अब परंपरा को निभाने के लिए कोई नहीं आता।
स्थानीय निवासी जगत राम ने बताया कि राजाओं के समय में मिंजर को लेकर लोगों में काफी उत्साह होता था। लोग जिस दिन मिंजर शुरू होती थी उस दिन से लेकर आखिरी दिन तक कमीज पर मिंजर बांधे रखते थे। बुजुर्ग हरि कृष्ण ने बताया कि एक दौर था जब वह रात को दो-दो बजे तथा सांस्कृतिक संध्या का लुत्फ उठाते थे लेकिन आज दस बजे ही ताम झाम बंद हो जाता है। दस बजे तक तो लोग अपने काम से फ्री नहीं होते हैं। ऐसे में मिंजर कैसे देख पाएंगे।
मेले का हो रहा राजनीतिकरण
नगर परिषद अध्यक्ष अनीता ठाकुर ने बताया कि मिंजर मेले का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इस कारण प्राचीन संस्कृति को काफी गहरा धक्का लग रहा है। नगर परिषद ने प्राचीन संस्कृति को संजो कर रखा है लेकिन कुछ राजनीतिज्ञ हस्तक्षेप करके मेले का स्वरूप बिगाड़ चुके हैं।

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