
अल्मोड़ा। हरियाणा के रहने वाले पायलट कैप्टन भूपेंद्र का कहना है कि उत्तराखंड के केदारनाथ, रामबाड़ा में आई आपदा की त्रासदी का खौफनाफ मंजर हर किसी को झकझोर देने वाला था। आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए जब वह हेलीकाप्टर से केदारनाथ क्षेत्र में पहुंचे तो एक तरफ मौत का सामना था तो दूसरी तरफ मौत के मुंह में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का लक्ष्य।
यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जंगल चट्टी के पास एक स्थान पर तीन महिलाएं खड़ी थीं और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए हाथ हिला रही थी। मौसम खराब रहने के कारण वे उन्हें सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचा पाए। इसका उन्हें मलाल है। उन्होंने दावा किया कि आपदा क्षेत्र में उन्होंने सबसे पहले अपने निजी हेलीकाप्टर से सेवा दी। केदारनाथ रामबाड़ा के लिए हवाई उड़ान भरकर सर्वेक्षण किया तो वहां स्थिति बदल चुकी थी। रामबाड़ा का पूरी तरह सफाया हो चुका था। लोग भयभीत और असहाय थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे। गौरीकुंड तक यही स्थिति थी। लोग जगह-जगह फंसे थे। एक तरफ रास्ते ध्वस्त हो गए थे वहीं फोन पर भी लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था। 18 जुलाई को मौसम खुलते ही उन्होंने उड़ान भर दी। मंदिर से तीन चार किमी दूर गरुड़चट्टी पर बने हेलीपैड पर जैसे ही लोगों को उठाने के लिए उतरते तो मौसम खराब हो जाता था।
उन्होंने बताया कि अन्य स्थानों पर बने कई हेलीपैड भी ध्वस्त हो गए थे। मौसम खराब होने से आपदा राहत कार्य में काफी दिक्कतें हुई। रामबाड़ा क्षेत्र में ही दस हजार लोगों की मौत होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि मौत के मुंह में फंसे कई लोगों को उन्होंने निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस मौके पर विधायक अजय टम्टा आदि मौजूद थे।
