आदमखोर तेंदुआ शूटरों की पकड़ से बाहर

गोहर (मंडी)। जंजैहली घाटी में आदमखोर तेंदुए ने अपने खूनी जबड़े से जो भयंकर मंजर दिखाया है, उससे घाटी की जिंदगी सहम गई है। आलम यह है कि शाम चार बजे के बाद आदमखोर तेंदुए के खौफ से जंजैहली घाटी के लोग घरों में दुबक जाते हैं। महिलाएं अकेले खेतों में जाने से कतरा रही हैं और बच्चों पर अभिभावकों ने पहरा बिठाया हुआ है। किसान शाम चार बजे के बाद खेतों से टोलियां बनाकर वापस घर लौट जाते हैं। सेब बागवान भी बंपर फसल होने के बावजूद आदमखोर तेंदुए के डर से शाम ठीक चार बजे बगीचा छोड़ देने को मजबूर हैं। लोगों को इंतजार है तो तेंदुए की मौत का।
थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में आदमखोर तेंदुए के हमलों से लोग खौफजदा हैं। शार्प शूटरों और ट्रैप कैमरों की पकड़ जारी है, लेकिन अभी तक आदमखोर तेंदुआ पकड़ में नहीं आ सका है। पिछले दो दिनों से तेंदुए का हमला थम गया है। वन और वाइल्ड लाइफ विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तेंदुआ न मिलने से सांस फूली हुई है। विभागीय अधिकारी और शूटर थुनाग और आसपास के क्षेत्रों में दिन-रात डेरा जमाए हुए हैं। मगर आदमखोर तेंदुआ पकड़ से परे है। तेंदुए की दहशत जंजैहली घाटी के लोगों को आराम से जीने नहीं दे रही है। आदमखोर तेंदुए ने एक सप्ताह में जंजैहली घाटी में चार हमले किए। दो महिलाओं समेत एक गाय को मौत के घाट उतार दिया। जबकि खुशकिस्मत एक बुजुर्ग गंभीर घायल हुआ मगर जान बच गई। यही नहीं जान की सुरक्षा के लिए घाटी के लोग देवी-देवताओं की आराधना में लीन हो गए हैं। क्षेत्र के तेज सिंह ठाकुर, ललित कुमार, मोहर सिंह, गोपाल सिंह, आलमू एवं मुरारी आदि ने बताया कि वे चार बजे के बाद घरों में दुबक जाते हैं। क्षेत्र की महिलाएं भी तेंदुए के डर से खासी भयभीत हैं। उधर, डीएफओ गोहर पीडी डोगरा ने बताया कि विभाग तेंदुए का पता लगा रहा है। जल्द ही उसे मार दिया जाएगा।

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