फौजी मुंडा आई गेया छुट्टी… पर झूमे दर्शक

चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या मशहूर कव्वाल जावेद इरशाद रहमत और पहाड़ी लोक गायक करनैल राणा के नाम रही। जावेद ने अपनी मशहूर गजलें तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले, अली मौला, न कर साकी अड़िए मैं तां पीनी है… सुनाकर मंत्रमुग्ध किया। इससे पहले पहाड़ी लोक गायक करनैल राणा ने खूब समां बांधा। उन्होंने पहाड़ी गीत पेश कर चौगान में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कैसा लगा गोरिए पहाड़ा बसणा, हुण वो कुतांई जो नसदा धुडुआ, फौजी मुंडा आई गेया, मेरे हिकडुए गड़बड़ होई, माए नी मेरिये चंबा कितनी दूर गाने गाए और युवाओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। उनके साथ अमरीक सिंह, प्रमोद राणा, सुनील कुमार, अशोक चौधरी ने कार्यक्रम को धमाकेदार बनाने में सहयोग दिया। रविवार को पहली सांस्कृतिक संध्या का आगाज शाम चार बजे रोशन एंड पार्टी ने शिव वंदना से किया। इसके बाद हरिंद्र भारद्वाज और सावन जरयाल ने भी खूब समां बांधा। पहाड़ी गायक शेर सिंह के बेटे सावन जरयाल ने सुन चरखे दी मीठी-मीठी घूक, सपड़ां बिच सप रहदें, जोड़ी तेरी मेरी भला गद्दिया, पानी री टंकी, नीरू चली घुमदी, ऊंचेया पहाड़ा दी सैर कराइए गाने गाए। साहिल म्यूजिकल ग्रुप शिमला के कलाकारों ने भी कार्यक्रम पेश किया। वंदना कला मंच के कलाकार पवन कुमार, मनू, दुनी चंद राठौर और चांदनी ने इस गराएं देया लंबरा हो, मेरी ती चोली, चिटटी चादर गाने पेश कर तालियां बटोरीं। भलेई की डिंपल शर्मा और मैहला के विनय अबरोल ने भी प्रस्तुतियां दी। डिंपल शर्मा ने परदेसिया-परदेसिया, माही मेरा बड़ा सोणा, डफली वाले डफली बजा, चंबा आर की नदिया पार, सुण जोबणु नणाने गाने गाए। इसके बाद चंबा के युवा गायक और वायस आफ हिमालया के विजेता सुभम सूर्या ने सुन रहा है न तू, तुम ही हो, पानी दा रंग, चुरा लिया है तूने जो दिल मेरा, मन मेरा गाने गाकर दर्शकों को खूब मनोरंजन किया। शाम सात बजे के करीब चंद एंड पार्टी ने कुजड़ी मल्हार पेश किया।

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