
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार स्टाल काफी महंगे बिके हैं। इसके अलावा व्यापारियों को कारोबार करने के लिए समय भी कम मिला है। इसके चलते कई कारोबारियों ने मिंजर मेले में आने से तौबा कर ली है। बाहरी राज्यों के व्यापारियों के न आने से इस बार 60 के करीब दुकानें खाली पड़ी हैं। इन दुकानों को अब तक किसी ने नहीं खरीदा है। दिल्ली से आए कारोबारी मुन्ना लाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से इस बार एक स्टाल को 50 से 60 हजार रुपये में बेचा गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन दुकानें एक लाख 65 हजार रुपये में मिली हैं, लेकिन कारोबार के लिए समय कम होने के कारण उन्हें इस बार घाटा उठाने की चिंता सता रही है। उत्तर प्रदेश से मिंजर मेले में पहुंचे कारोबारी तनबीर ने बताया कि वे 12 वर्ष से मिंजर मेले में दुकान लगाते आ रहे हैं, लेकिन इस बार तो प्रशासन ने हद ही कर दी। उन्होंने कहा कि एक तो कारोबार के लिए समय कम कर दिया है, ऊपर से स्टाल इतने महंगे दाम पर बेचे हैं कि उनका खर्चा भी पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि गत वर्ष भी प्रशासन ने स्टाल महंगे बेचे थे, लेकिन कारोबार के लिए समय अधिक होने के कारण कारोबार अच्छा हो गया था। अमृतसर के व्यापारी शमशेर ने बताया कि स्टाल महंगे मिलने के कारण और समय कम होने के कारण उन्हें मंदी से गुजरना पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह से 60 के करीब स्टाफ खाली पड़े हैं, अगर प्रशासन रेट कम करता तो इसके दो फायदे होने थे। एक तो व्यापारियों को कम रेट पर स्टाल उपलब्ध होने थे और दूसरा अधिक दुकानदारों को व्यापार करने का मौका मिलना था। कम दुकानदारों पर इतना ज्यादा किराया थोपने से काफी कुछ प्रभावित होगा।
बाक्स
औने-पौने दामों पर बेची जा रही दुकानें
शुरुआत में प्रशासन की ओर से जहां एक दुकान को 50 से 55 हजार में बेचा गया है वहीं दुकानें खाली रह जाने के कारण प्रशासन की ओर से अब औने पौने दामों पर दुकानों का आवंटन किया जा रहा है। इससे पहले दुकानें खरीद चुके कारोबारी नाराज हैं। कारोबारी रमेश कुमार, साहिल, हसदीन, जानेंद्र व लोकेंद्र ने बताया कि प्रशासन ने अब 10 से 20 हजार रुपये में दुकानें बेचनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से कारोबारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दुकानों का किराया एक जैसा रखा जाएग और कारोबार के लिए समय भी बढ़ाया जाए।
