कहीं खतरा तो कहीं दरक रही जमीन

नाचनी (पिथौरागढ़)। थल मुनस्यारी सड़क में रातीगाड़ के पास जमीन बुरी तरह दरक रही है। एक साथ पहाड़ नीचे गिरा तो सड़क और लोगों के खेतों का काफी हिस्सा रामगंगा में समा जाएगा। खतरे की जद में आकर घरों को छोड़ चुके नाचनी क्षेत्र के 77 परिवार सुरक्षित ठिकाने के लिए तरस रहे हैं।
आपदा पिथौरागढ़ जिले खासकर मुनस्यारी, धारचूला के लोगों के लिए नई नहीं है। हर साल बरसात में आशियाने ढहने का दंश झेलना, खतरे की जद में आए मकानों से बरसात तक अन्यत्र चले जाना, मकान सुरक्षित रहे तो बरसात के बाद फिर उन्हीं में लौट आना, आपदा की दृष्टि से संवेदनशील, अति संवेदनशील गांवों के लोगों की मजबूरी बन गया है।
तल्लाजोहार के ला, झेकला, बरम हादसे याद होंगे। सात अगस्त 2009 को ला, झेकला के जिन 43 लोगों की जान गई थी, उनमें बेड़ूमहर ग्राम पंचायत के रुमीडोला तोक के भी पांच लोग शामिल थे। रुमीडोला के 7 परिवारों को तो अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया लेकिन 8 परिवार अब भी खतरे में जी रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता भगत बाछमी कहते हैं कि किमखेत के तोली तोक के 12, सैणराथी के 8, नाचनी के नया बस्ती के 24, नौलारौड़ा के 10, बेेल्सा के 15 परिवार या तो जर्जर मकानों में रह रहे हैं या अन्यत्र शरण ले रखी है। आपदा प्रबंधन पर अरबों खर्च करने वाली सरकारों को इन्हें सुरक्षित ठौर उपलब्ध कराना चाहिए।

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