बीकॉम की तीन क्लासों को पढ़ाने को सिर्फ एक शिक्षक

हल्द्वानी। प्रदेश के एकमात्र राजकीय महिला महाविद्यालय में स्थापना से लेकर अब तक शिक्षक का एक भी पद नहीं बढ़ सका है। हाल यह है कि बीकॉम प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष की तीन क्लासों को पढ़ाने की जिम्मेदारी एक शिक्षक के जिम्मे है। संसाधन नहीं बढ़ने से कालेज में छात्राओं की संख्या एक हजार का आंकड़ा भी पार नहीं कर पा रही है।
राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद उच्चशिक्षा पटरी पर नहीं आ सकी है। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने यहां राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना कराई थी। राज्य गठन के 12 साल गुजर चुके हैं, मगर इस कालेज में संसाधनों को बढ़ाने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। छात्राओं के मनपसंद विषय संगीत, ड्राइंग और भूगोल तक नहीं खुल सके। इसका परिणाम यह हुआ कि कई बार प्रयास के बावजूद कालेज में एडमिशन लेने वाली छात्राओं की संख्या एक हजार से ऊपर नहीं पहुंच पा रही है। एडमिशन प्रक्रिया का दूसरा सप्ताह चल रहा है और अब तक तीन सौ के ऊपर प्रवेश नहीं हो सके हैं। कला संकाय की अपेक्षा विज्ञान संकाय में एडमिशन अधिक होते हैं, क्योंकि बीएससी में पढ़ाने के लिए शिक्षिकाओं की तैनाती है, लेकिन कामर्स संकाय की हाल बुरा है। बीकॉम के प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष तक की तीन क्लासों को पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक का पद है। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. बृजमोहन परगांई अकेले तीन क्लासों को संभालते हैं। इधर, लंबे समय से महिला महाविद्यालय को स्नातकोत्तर (पीजी) करने की मांग उठती रही है, लेकिन कालेज भवन के आधे हिस्से में उच्चशिक्षा निदेशालय दफ्तर चलने से यह मांग भी पूरी नहीं हो सकी है। स्नातक की पढ़ाई के बाद छात्राओं को पीजी करने के लिए एमबीपीजी कालेज जाना पड़ता है। उच्चशिक्षा निदेशालय को इस महिला महाविद्यालय की दशा सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए।

छात्रा संख्या बढ़ाने के प्रयास होंगे : प्राचार्य
हल्द्वानी। महिला कालेज के प्राचार्य डा. जीएस बिष्ट कहते हैं कि अधिक से अधिक छात्राएं एडमिशन लें, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपनी बेटियों का महिला कालेज में एडमिशन कराएं, लड़कियों के लिए कालेज में शैक्षिक माहौल बेहतर है। उन्होंने कहा कि संगीत एवं ड्राइंग आदि विषय शुरू किए जाने के लिए उच्चशिक्षा निदेशालय के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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