बेटों के बड़े घरों में नहीं वृद्ध मां को जगह

नेरचौक (मंडी)। जिस मां ने अपने बेटों को नौ महीने पेट में रखा, बचपन में उन्हें दुलारा, हर ख्वाहिश पूरी की, आज उसी मां के लिए बेटों के आलीशान घरों में जगह नहीं है। महिला आयोग की अध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर की अगुवाई में एक दल ने शुक्रवार को बल्हघाटी के कैहड़ गांव में पुराने कमरे से निकाल कर इस बुजुर्ग महिला को वृद्धा आश्रम पहुंचा दिया। महिला आयोग ने गुप्त सूचना के आधार पर बेटों की उपेक्षा की शिकार 94 वर्षीय रेशमू देवी पत्नी स्व हेमप्रभ को पुराने घर के कमरे से आजाद करवाकर वृद्धाश्रम भंगरोटू में छोड़ दिया। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें मंडी से किसी समाज सेवी की ओर से इस बारे में सूचना दी थी। जिस पर आयोग ने कार्रवाई करते हुए उक्त महिला को उसकी हालत को देखते हुए वृद्धाश्रम पहुंचाया। 94 वर्षीय मां जिसका बड़ा बेटा प्रदेश सरकार के अहम पद से सेवानिवृत्त हुआ है और दूसरा बेटा अधिवक्ता है। वह मंडी में ही रहता है तथा दो बेटियां भी हैं। केवल बेटियां ही अपनी मां की देखभाल करती थीं, लेकिन कुछ समय से उन दोनों की तबीयत खराब रह रही है। महिला आयोग ने शुक्रवार को रेशमू को वृद्धाश्रम भंगरोटू में रखा है। चवाड़ी ग्राम पंचायत प्रधान कुसम लता ने बताया कि उन्हें रेशमू देवी के बहू-बेटे रघुवीर पाठक की ओर से प्रार्थना पत्र मिला था। जिसमें उन्होंने स्वयं को हृदय रोगी बता कर शिमला में उपचार के लिए जाने की बात कही थी। आज महिला आयोग वाले बुजुर्ग महिला को वृद्धाश्रम ले गए। कैहड़ पंचायत के लोगों ने महिला आयोग से गुजारिश की है कि रेशमू को यहां से ले जाओ, उसकी इस दशा को वे देख नहीं सकते। स्थानीय निवासी प्रकाश चंद, हेमराज, हंसराज, सुनील कुमार, उत्तम चंद, चुनी लाल, कृष्ण चंद, पुरन देव भारती ने कहा कि महिला आयोग का यह कदम प्रशंसनीय है। वृद्धाश्रम के प्रधान दिनेश वशिष्ट ने कहा कि बेबस महिला को आश्रम में रख लिया है।

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