पुरातत्व विभाग ने किया स्मृति वृक्ष का निरीक्षण

दुगड्डा। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के स्मृति वृक्ष का बृहस्पतिवार को पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वेक्षण किया। टीम में शामिल अधिकारियों ने इस बात पर अफसोस जताया कि सात साल बीतने के बाद भी इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण नहीं हो पाया। इस सर्वेक्षण के बाद स्मृति वृक्ष के शीघ्र संरक्षण की उम्मीद जगी है।
दुगड्डा के पास आजाद पार्क स्थित स्मृति वृक्ष आजादी के नायकों की यादों को अपने आप में समेटे समेटे हुए धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ रहा है। सात साल पहले 12 मई 2006 को यह वृक्ष तेज हवा में धराशायी हो गया था। तब से इसके संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। चंद्रशेेखर आजाद के करीबी रहे क्रांतिकारी भवानी सिंह का समाधि स्थल यहीं पर बनाया गया है। इसमें वृक्ष के कुछ टुकड़े रखे गए हैं जो मिट्टी में तब्दील होते जा रहे हैं। आजाद के बलिदान दिवस 27 फरवरी 2013 को स्थानीय लोगों ने इस वृक्ष को संरक्षण के लिए ब्लाक प्रमुख से मांग की थी। इसके बाद इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ी। बृहस्पतिवार को पुरातत्व विभाग पौड़ी से संरक्षण सहायक अनिल नेगी ने यहां आकर वृक्ष का निरीक्षण किया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा विभाग अपने हिसाब से संरक्षण करता है। वृक्षों के अवशेषों का संरक्षण छत के नीचे रखने से नहीं होता है। यह स्थान वन विभाग की भूमि में है इसलिए विभाग को यहां पर काम करने की अनुमति मिलना मुश्किल है। इसके लिए वन विभाग को एफआरआई देहरादून के वैज्ञानिकों से सहायता लेनी चाहिए।
इस संबंध में ब्लाक प्रमुख गीता नेगी ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से जिलाधिकारी पौड़ी को अनिवार्य कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है। लेकिन डीएफओ कार्यालय से इसके सौंदर्यीकरण के लिए प्राकलन तक तैयार नहीं किया गया।

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