200 ग्लेशियर झीलें ढा सकती हैं कहर

मंडी। प्रकृति का भयानक कहर टूटा तो उत्तराखंड सरीखे हालात देश के अन्य भागों में भी हो सकते हैं। पर्यावरण में आए परिवर्तन से देश में प्राकृतिक आपदा का प्रबल खतरा मंडरा रहा है। आपदाओं की श्रेणी में भारत दूनिया में दूसरे स्थान पर है। पंडोह में आयोजित कार्यशाला में आपदा पर गहन चिंतन हुआ। जवाहर नवोदय विद्यालय पंडोह में नवोदय विद्यालय समिति चंडीगढ़ के तहत 28 जुलाई तक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पंजाब, जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल के नवोदय विद्यालयाें के चुनिंदा शिक्षक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में बतौर रिसोर्स पर्सन उपस्थित मंडी कालेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष सहायक प्रो. डा. चमन प्रेमी ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे परिवर्तन की वजह से हिमालय के ग्लेशियरों को भारी खतरा है। 20 हजार के करीब ग्लेशियर झीलें ग्लेशियरों के पिघलने से बन चुकी हैं। इनमें निकट भविष्य में 200 ग्लेशियर झीलें विनाशकारी बाढ़ाें की वजह बन सकती हैं। डा. चमन प्रेमी ने कहा कि इंटर गवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट के अनुसार देश में 12 प्रतिशत भूमि प्रलयकारी भूकंप आने के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। 100 वर्षों में प्रदेश की राजधानी शिमला के औसत तापमान में लगभग एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी 90 साल में पृथ्वी के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की संभावना है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए जागरूकता, वैज्ञानिक ज्ञान तथा सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानाें की सहभागिता अनिवार्य है। जवाहर नवोदय विद्यालय पंडोह के प्राचार्य आरआर तिवारी ने भी विचार रखे।

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