
मंडी। मंडी जिले के गोहर उपमंडल में आदमखोर तेंदुए के आतंक से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पहले राधा देवी और फिर मणीदेवी, एक के बाद एक तेंदुए के खूनी जबड़े का शिकार हुईं। तेंदुआ एक सप्ताह के अंदर चार लोगों पर हमला करके दो महिलाओं को अपना शिकार बना चुका है। जबकि एक बुजुर्ग और एक बच्ची किसी तरह तेंदुए की चंगुल से बच पाए हैं। इस आदमखोर तेंदुए को मारने की वन्यप्राणी संरक्षण विभाग की ओर से अनुमति मिल गई है। जिसके चलते सोलन से शार्प शूटर्स का दल शुक्रवार शाम तक सराजघाटी में पहुंच जाएगा। जबकि, कटौला क्षेत्र के दो शार्प शूटर सराजघाटी में पहुंच गए हैं। जिले में करीब सोलह साल पूर्व भी चौंतड़ा क्षेत्र में तेंदुए के लगातार हमलों से कई लोगों की जान गई थी। जिसके चलते करीब एक डेढ़ महीने की मशक्कत के बाद आदमखोर तेंदुए को मार गिराया था। पिछले दो दशक में जिले में तेंदुए के मानव पर हमलों की कई घटनाएं को चुकी हैं। इन वन्यजीवों का साल दर साल आदमखोर होना चिंता का विषय है। वहीं इसे पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से भी जोड़ा जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुआ मांसाहारी जानवर है। जंगलों में इसका भोजन बनने वाले छोटे वन्य जीव खरगोश, ककड़, घोरल, जंगली मुर्गे और अन्य जंगली जानवर लगातार खत्म हो रहे हैं। जबकि, तेंदुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है। सेवानिवृत्त वन अधिकारी एवं हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह तनवर का कहना है कि तेंदुओं की जंगलों पर निर्भरता खत्म हो गई है। जिसके चलते वे बस्तियों के आसपास रुख करते हैं। इनका पहला निशाना पालतू जानवर और कुत्ते होते हैं। मगर भूख से बेहाल जानवर अब आदमखोर होने लगे है। इधर, कार्यकारी अरण्यपाल बीएस राणा का कहना है कि आदमखोर तेंदुए को मारने की इजाजत ले ली गई है। सोलन से शार्प शूटर्स की टीम शुक्रवार शाम तक सराजघाटी में पहुंच जाएगी। जबकि कटौला से दो शार्प शूटर्स क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे शार्प शूटर्स को अपना कार्य करने दें। किसी तरह का शोरशराबा करने पर तेंदुए अपना इलाका बदल देते हैं।
