
बैजनाथ (कांगड़ा)। पुरातत्व विभाग के तहत आने वाले उपमंडल के दोनोें ऐतिहासिक शिव मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर में पानी का रिसाव होने के कारण इनके अस्तित्व को भविष्य में खतरा पैदा हो सकता है। ऐतिहासिक शिव मंदिर के गर्भ गृह के बाहर के हिस्से की बाईं तरफ की दीवार पर बरसात होने पर पानी आना शुरू हो गया है।
ऐसा नहीं है कि पानी का रिसाव पहली मर्तबा शुरू हुआ हो। पिछले तीन वर्षों से बरसात के मौसम में पानी का रिसाव शुरू हो जाता है। वास्तुकारों की मानें तो पानी का यह रिसाव भविष्य में मंदिर के लिए खतरनाक हो सकता है। दूसरी तरफ चौबीन चौक के समीप स्थित सिद्धनाथ मंदिर की हालत दयनीय बनी हुई है। थोड़ी सी बारिश होने पर मंदिर के अंदर का अधिकांश भाग टपकने लगता है। यहां तक कि मंदिर के गर्भ गृह में पानी टपकना शुरू हो रहा है। मंदिर के दक्षिण हिस्से के पिल्लर की आर्च टूटने के कगार पर है और कभी यह भाग नीचे गिर सकता है। मंदिर के इस हिस्से के नीचे गिरने से मंदिर के अधिकांश भाग को क्षति पहुंच सकती है। मंदिर न्यास के ट्रस्टी बंसी लाल, पीसी अवस्थी, रमेश चड्ढा, मिलाप राणा, घनश्याम अवस्थी, अनूप कौल, जीडी अवस्थी, बलदेव नंदा और सुरेश शर्मा का कहना है कि पानी का रिसाव मंदिरों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होने विभाग से इसकी मरम्मत करवाने का आग्रह किया है। विभाग के शिमला स्थित अधीक्षण अभियंता जुल्फीकार अली ने बताया कि ऐतिहासिक शिव मंदिर में पानी के रिसाव को प्राथमिकता के आधार पर बंद किया जाएगा और भविष्य में सिद्धनाथ मंदिर के मरम्मत कार्य को शुरू किया जाएगा।
