फर्जी डाक्टर, खतरे में जान

नूरपुर (कांगड़ा)। स्थानीय इंदौरा, नूरपुर, फतेहपुर तथा जवाली क्षेत्र के गांवों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के नाम पर इन दिनों तीन दर्जन से ऊपर फर्जी डाक्टरों का अलग-अलग गांवों में जमावड़ा लगा हुआ है। सूबे से बाहर पंजाब से आने वाले इन तथाकथित डाक्टरों के झांसे में आने से कई लोग ठगे जा चुके हैं।
यह फर्जी डाक्टर गांव में जाकर मरीजों का एंपेंडिक्स, बच्चादानी, गालब्लेडर, डिलीवरी तथा आप्रेशन भी कर रहे हैं। इससे कई लोग जानलेवा बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। तथाकथित इन डाक्टरों की नजर गांव के भोले भाले लोगों पर ही रहती है। क्षेत्र में कुछेक क्लीनिक भी देखने को मिल रहे हैं, जो दिहाड़ी पर पंजाब से डाक्टरों को मरीज के इलाज के लिए बुला रहे हैं। एक विशेषज्ञ डाक्टर के अनुसार गांवों में घूमने वाले डाक्टर मरीजों को स्टाराइड तथा पिटोसीन जैसी दवाइयां देकर उनकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस दवाई से मरीज की हड्डियों को नुकसान पहुंचता है। पंजाब से लगभग 40 फर्जी डाक्टरों ने हिमाचल के इन गांवों को अपने कब्जे में कर रखा है। इन डाक्टरों के पास न तो कोई डिग्री है और न ही किसी संस्था से पंजीकृत हैं। कई तो बिना पंजीकरण के ही अपनी दुकान चला रहे हैं। क्लीनिक इस्टैवलिशमेंट एक्ट-10 के अनुसार किसी मरीज के इलाज के लिए उसे स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं देने के बाद ही उसका इलाज किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के मापदंडों की नजरअंदाजी करके कुछ लोगों ने एक कमरे में ही आप्रेशन थिएटर, माइनर आप्रेशन, लेबर तथा आपात रूम खोल रखे हैं। आप्रेशन के बाद मरीजों को उनके हाल पर छोड़ कर निकल जाते हैं।

सरकारी अस्पतालों में जाएं मरीज : गुप्ता
बीएमओ डा. बीएम गुप्ता का कहना है कि जब कभी भी हमें ऐसे फर्जी डाक्टरों के बारे में पता चलता है। उनके खिलाफ एफआईआर करवाई जाती है। डा. गुप्ता का कहना है कि कोई भी पंजीकरण के बिना ऐसी प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। पंजाब से आने वाले ऐसे डाक्टर हिमाचल में बैन हैं। लोगों को इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हर जगह पर अच्छे अस्पताल, सीएचसी तथा पीएचसी खोल रखे हैं।

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