विद्युत बोर्ड को दो हजार का हर्जाना

मंडी। जिला उपभोक्ता फोरम ने विद्युत बोर्ड को उपभोक्ता से संडरी चार्जेज के रूप में वसूले गए 178 रुपये और ई-ड्यूटी के 24 रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिये। इसके अलावा बोर्ड की सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के बदले 2000 रुपये हर्जाना और शिकायत व्यय के रूप में 1000 रुपये अदा करने का फैसला सुनाया। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जेएन यादव और सदस्यों रमा वर्मा एवं लाल सिंह ने अपर सुहड़ा निवासी कृष्ण सिंह वर्मा पुत्र सोहन सिंह वर्मा की शिकायत को उचित मानते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को उक्त राशि का भुगतान 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित करने के आदेश दिए। अधिवक्ता भूपिंद्र शर्मा के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता अपर सुहडा मुहल्ला में जुलाई 2007 से बतौर किरायेदार रह रहे हैं। उपभोक्ता के किराए के मकान में बिजली बोर्ड का मीटर राजेश कौशल के नाम से लगा हुआ है। उपभोक्ता को हर माह सौ से दो सौ रुपये का बिल आता था। जिसे वह नियमित तौर पर दे रहे थे। लेकिन, सितंबर 2011 में उपभोक्ता को 341 रुपये का बिल जारी किया गया। इस बिल में करंट एनर्जी चार्ज 59 रुपये, संडरी चार्ज 178 रुपये और 24 रुपये ई ड्यूटी के रूप में दर्शाये गये थे। औसत से अधिक बिल आने पर उपभोक्ता ने बोर्ड के अधिकारियों से संपर्क करके न्यायोचित बिल जारी करने के लिए आग्रह किया था। विवाद के न सुलझ पाने के कारण उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दायर की थी। शिकायत के जवाब में बोर्ड का कहना था कि उपभोक्ता से संडरी चार्ज और ई ड्यूटी के रूप में वसूल की गई राशि एक अप्रैल 2010 से लागू हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के संशोधित टैरिफ के तहत ली गई है। बोर्ड की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे जाहिर होता हो कि संडरी चार्ज और ई ड्यूटी वसूले जाने से पहले उपभोक्ता की सुनवाई की गई हो। प्रदेश राज्य उपभोक्ता कमीशन ने विद्युत बोर्ड बनाम जसवंत राय सूद तथा अन्य के मामले में व्यवस्था दी है कि संडरी चार्ज लगाए जाने से पहले उपभोक्ता की सुनवाई को मौका दिया जाना चाहिए। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि बोर्ड रेगुलेटरी कमीशन के फैसले को भी प्रस्तुत नहीं कर सका। ऐसे में फोरम ने शिकायत को स्वीकारते हुए बोर्ड की सेवाओं में कमी को आंकते हुए उपभोक्ता से वसूले गए संडरी चार्ज और ई ड्यूटी की राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिये। इसके अलावा उपभोक्ता को बोर्ड के गलत बिल जारी करने से हुई मानसिक परेशानी के बदले हर्जाना राशि और शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया।

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