
बिलासपुर। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आयोजित साहित्य एवं कवि कोष्ठी में लेखकों ने अपनी-अनपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। जिला भाषा अधिकारी डा. अनीता शर्मा के मंच संचालन में आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता आशा कुरैशी ने की।
सरस्वती मां की पूजा-अर्चना के बाद कविता पाठ का दौर शुरू हुआ। लश्करी राम ने तंबाकू व गुटखा खाने वालों पर व्यंग कसते हुए कहा ‘गंदगी पसंद हो तो जर्दा खाना सीख लो’। रतन चंद ने ‘बिटिया टक-टक निहार रही’ रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। कुलदीप चंदेल ने ‘मृत्युदेव की भृकुटि तन गई है’ से जीवन की सच्चाई का उल्लेख किया। नरऊण राम हितैषी ने ‘आपकी महफिल में यूं ही चला आता हूं’, प्रदीप गुप्ता ने ‘तुम करत रहते घोटाले पर घोटाले, फिर भी टीवी पर छाए रहते’, आनंदर सोहर ने ‘बाबा केदार अब नजर आता है रगड़ना उसके दर पर माथा’, डा. अनीता शर्मा ने ‘बरसात में पानी लगता है तो रिसता है घाव’ कविता सुनाई। अनूप सिंह मस्ताना ने ‘कंटीली डाली में सजा फूल भर देता है अनोखी मुस्कान’ कविता सुनाई। सुरेंद्र मिन्हास की ‘भारत माता पर तुम कंकरीट नहीं चढ़ाओगे’ से देशभक्ति का जज्बा पैदा किया। आशा कुरैशी ने ‘आंखें हैं नम दिल धड़कना भूल गया है, देखा ऐसा प्रलय जो एक भूखंड का निगल गया’ सुनाकर उत्तराखंड का दर्द सांझा किया। इस अवसर पर साहित्यकार रतन चंद ने सुझाव दिया कि उत्तराखंड जैसी घटनाओं पर रचित कविताएं व उत्तराखंड आपदा पर लिखी कविताओं का एक संग्रह सांझे प्रयास से प्रकाशित करवाया जाए।
