
रुद्रप्रयाग। गुजरात सहित अन्य क्षेत्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से आपदा प्रभावितों के लिए खूब मदद पहुंच रही है। स्थिति यह है कि गोदामों में सामग्री रखने के लिए जगह नहीं है। सामग्री रखने के लिए प्रशासन को निजी गोदाम अधिगृहीत करने पड़ रहे हैं। वहीं सड़कों के न खुलने और पैदल पुलों के ध्वस्त होने से राहत सामग्री गोदामों में डंप हो रही है।
कुछ संस्थाएं प्रशासन के माध्यम से और कुछ अपने स्तर से राहत सामग्री बांट रही है। प्रशासन के स्तर पर कुछ स्थानों पर वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिल रही हैं। गत शाम सिंचाई विभाग गोदाम से राहत सामग्री ले जाते समय ही ऐसा मामला आया। ट्रक में भरकर जब राहत सामग्री ले जाई जा रही थी, तो ट्रक में सवार कर्मियों ने पीछे तिरपाल फेंकने शुरू कर दिए। बेलणी में लोगों ने जब यह देखा तो घपला हो गया। आनन-फानन में कर्मियों ने दोबारा तिरपाल ट्रक में रख दिए। मामला बढ़ने पर तहसीलदार सदर एसपी उनियाल ने अपने समक्ष तिरपाल गिनवाए।
जिला मुख्यालय में लघु सिंचाई, राजकीय सिंचाई और बारातघर सहित निजी गोदाम राहत सामग्रियों से भरे हैं। गुलाबराय में तीन ट्रक दो दिन से खडे़ हैं। लेकिन गोदाम में जगह नहीं है। ट्रक चालकों का कहना है कि न तो ट्रक भेजने वाले अधिकारी फोन उठा रहे हैं और न ही यहां के अधिकारी फोन उठा रहे हैं।
सड़कें बंद, कहीं सड़ न जाए राशन
प्रभावितों तक नहीं पहुंच पा रही हैं राहत सामग्री
रुद्रप्रयाग। जिले में आई दैवी आपदा के एक माह बाद भी अभी तक सड़काें की स्थिति सही नहीं हो पाई है, जिससे वाहनाें की आवाजाही ठप है, जिससे विभिन्न स्थानाें पर राहत सामग्री प्रभावितों तक नहीं पहुंच पा रही है।
जिले में एक माह बाद भी स्थितियां सामान्य नहीं हो पाई है। सड़कें बंद होने से राहत कार्य भी प्रभावित हो गए है। वर्तमान में मद्महेश्वर घाटी, कालीमठ घाटी, केदारघाटी, मंदाकिनी घाटी का संपर्क आपस में कटा हुआ है। सड़कें बंद होने से विभिन्न राज्याें व एनजीओ द्वारा मदद के लिए भेजी गई राहत सामग्री भी जिला मुख्यालय में ही डंप पड़ी है। वर्तमान में विभिन्न अस्थायी गोदामाें में राशन व अन्य राहत सामग्री बर्बाद हो रही है। वहीं लगातार हो रही बारिश से नमी के कारण राशन के खराब होने की भी आशंका है।
केदारनाथ एनएच का मरम्मत कार्य चालू है। अधिकारी-कर्मचारी पूरे मनोयोग के साथ सड़क खोलने में जुटे हैं। शीघ्र ही केदारनाथ एनएच को यातायात लायक खोल दिया जाएगा। -मुकेश कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी बीआरओ ।
