
शिमला। बिहार में मिड-डे मील खाने से हुई छात्रों की मौत के बाद सतर्क हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों को एहतियात बरतने के लिए निर्देश जारी किए हैं। इसमें स्कूलों में भोजन पकाने वाले मिड-डे मील वर्कर को अब साल में दो बार अपना स्वास्थ्य परीक्षण करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पूर्व यह चेकअप साल में एक बार किया जाता था। इसके साथ ही स्कूलों को मिले उप निदेशक एलीमेंटरी जिला शिमला के आदेशों में स्कूलों में मिड डे मील बनाने से लेकर इसे परोसने तक की प्रक्रिया में साफ सफाई और हर तरह की एहतियात बरतने के मिड डे मील इंचार्ज को निर्देश दिए गए हैं। इसमें अभिभावकों विशेष तौर पर छात्रों की माताओं को कभी भी, किसी भी समय पर निरीक्षण करने की आजादी दी है।
यही नहीं स्कूल प्रबंधन समिति स्कू ल के मिड डे मील के मेन्यू में भी बदलाव कर सकती है। उप निदेशक एलीमेंटरी टीसी वर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर स्कूल में साफ सुथरा और पौष्टिक मिड डे मील पका कर छात्रों को परोसा जाए, इसको लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल आफिसर समय-समय पर खाना पकाने वाले वर्कर और कुक की सेहत की भी जांच करेंगे। इसके साथ ही साल में दो बार कुक कम हेल्पर का मेडिकल चेकअप करवाना अनिवार्य किया गया है। सभी स्कूल मुखिया सीएचटी और मिड-डे मील के स्कूल इंचार्ज को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसएमसी को विश्वास में लेकर भोजन का मेन्यू तैयार करने और उनमें हर रोज एक अभिभावक को स्कूल में पकने वाले भोजन को टेस्ट करवाएं।
