
गोपेश्वर। आपदा के बाद जनपद के भ्यूंडार, पुलना, लामबगड़ और पिनोला गांव के ग्रामीण अपना सब कुछ गवां चुके हैं। इन दिनों गांवों के लोग शिविरों में दिन गुजार रहे हैं।
आपदा का सबसे बुरा प्रभाव नौनिहालों में देखने को मिल रहा है। यहां बच्चों में चिड़चिड़ापन, झुंझलाहट के लक्षण दिख रहे है। अब जबकि विद्यालय खुल गये हैं, लेकिन विद्यालय क्षतिग्र्रस्त होने से बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। अब इन बच्चों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाएं प्रयास कर रही हैं। इस क्रम में हिमाद समिति और चाइल्ड राइट एंड यू (क्राई) और जनदेश द्वारा किताबें, खेलकूद का सामान के माध्यम से बच्चों के बीच रचनात्मक गतिविधियां संचारित की जा रही हैं। हिमाद समिति सचिव उमा शंकर बिष्ट का कहना है कि घर से दूर राहत शिविरों में सरकार शीघ्र बच्चों के पठन-पाठन की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे बच्चों को ध्यान त्रासदी के सदमे से हटाया जा सकेगा, जिससे बच्चों का मानसिक दबाव कम होगा।
