
लोहाघाट। श्रावण मास शुरू होते ही नगर के प्रसिद्ध ऋषेश्वर महादेव मंदिर, हरेश्वर के शिव मंदिर, रेगडू के महादेव मंदिर, चमदेवल के शिव मंदिर में श्रावणी मेले शुरू हो जाते हैं। पूरे सावन में शिव शक्ति को जलाभिषेक करने का पुराणों में महात्म्य बताया गया है। ऋषेश्वर महादेव मंदिर में प्राकृतिक रूप से शिव शक्ति विराजमान है। कहा जाता है कि देवाधिदेव महादेव अपने भक्त वाणासुर की रक्षा के लिए स्वयं अवतरित हुए थे। इस धर्मयुद्ध में वाणासुर परास्त हुआ। युद्ध के बाद भगवान शिव कैलाश पर्वत की ओर लौट गए, लेकिन वह दंडाधिकारी, न्यायकारी के रूप में अपने बेतालों को छोड़ गए थे। तब से यहां शिव शक्ति के साथ बेताल बाबा को भी समान रूप से पूजा जाता है।
इस क्षेत्र में भगवान शिव विभिन्न नामों के साथ सप्तेश्वर के रूप में सात स्थानों में विराजमान हैं। इन्हीं सप्तेश्वरों में हरेश्वर शिव के अत्यधिक शक्तिशाली साक्षात न्यायकारी बेताल मंदिर के रूप में विख्यात हैं। लोहावती नदी के तट पर स्थित हरेश्वर बेताल के दरबार में दुनिया का हर वह फरियादी न्याय पाता है, जिसे कहीं न्याय नहीं मिलता है। यहां वर्षभर न्याय पाने वालों का तांता लगा रहता है।
