
शिमला। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई होम स्टे योजना का दुरुपयोग हो रहा है। मुनाफा कमाने के लिए मानकों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है। तीन की जगह छह से आठ कमरों में सैलानी ठहराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं होम स्टे इकाइयों में रेस्तरां तक खोल दिए गए हैं।
पर्यटन विभाग के इंस्पेक्टर (होटल) रवि धीमान की अगुवाई में विभाग की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग-22 पर शोघी और आनंदपुर में होम स्टे इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान 11 इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इसमें से 5 इकाइयों का अनियमितताओं के चलते चालान किया गया। होम स्टे में तीन की जगह आठ से दस कमरे चलाए जा रहे थे। इतना ही नहीं होम स्टे की आड़ में रेस्तरां भी चल रहा था। नियमों की अनदेखी करने वालों के लाइसेंस रद करने की सिफारिश की गई है।
पर्यटन विभाग के उप निदेशक सुरेंद्र जस्टा का कहना है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के चालान किए गए हैं। इकाइयों के लाइसेंस रद करने पर भी विभाग विचार कर रहा है।
घरेलू दरों पर बिजली, पानी और टैक्स भी माफ
होम स्टे योजना के तहत पंजीकृत भवनों का सरकार की ओर से टैक्स माफ किया गया है। भवनों के लिए बिजली और पानी के कनेक्शन भी व्यावसायिक की जगह घरेलू दरों पर मुहैया करवाए गए हैं।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना योजना का मकसद
2008 में शुरू की गई होम स्टे योजना का मकसद शहरों से बाहर पर्यटन को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पर्यटकों को होम स्टे में घर जैसा आरामदायक माहौल उपलब्ध करवाना लक्ष्य रखा गया है।
पंजीकरण की शर्तों का पालन अनिवार्य
होम स्टे योजना के तहत इकाई के पंजीकरण के समय रखी गई शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। पंजीकरण के समय तय दरों पर ही पर्यटकों से वसूली की जा सकती है। एक लाइसेंस पर अधिकतम तीन कमरों का ही बतौर होम स्टे इस्तेमाल हो सकता है।
