दूसरों को रोजगार देने वाले हुए बेरोजगार

लमगौंडी निवासी उमेश चंद्र पोस्ती के केदारनाथ में 25-30 कमरों के दो लॉज थे, लेकिन आपदा में दोनों ही ध्वस्त हो गए हैं। उन्होंने नंगे पैर भागकर किसी तरह जान बचाई। उन पर रिश्तेदारों से लिया 50 लाख रुपये का कर्ज भी है।
केस दो —
गुप्तकाशी के विपिन सेमवाल का गौरीकुंड और केदारनाथ में तीन लॉज, एक रेस्टोरेंट और एक कैंटीन तबाह हो चुके हैं। बैंक का कर्जा नहीं है, लेकिन हालात इस कदर दयनीय हो चुके हैं कि आगे के लिए कुछ सूझ नहीं रहा है। करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
केस तीन —
गुप्तकाशी के माधव कर्नाटकी का केदारनाथ में लॉज था। करीब 30 लाख रुपये की लागत का यह लॉज भी जलप्रलय की भेंट चढ़ चुका है। हालात यह है कि वे अब बैंक की किस्त जमा करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
केस चार
विजयनगर में झूला पुल के निकट शंभू प्रसाद थपलियाल की दो दुकानें थी, जिनका वे स्वयं संचालन करते थे। जबकि दो दुकानें किराए पर भी थी। लेकिन उनका आवासीय मकान, दुकानें जलप्रलय में समा चुकी हैं। हालात इस कदर हैं कि थपलियाल अपने परिवार सहित जीजीआईसी के एक कक्ष में पिछले एक माह से शरण लिए हुए हैं।
कर्णप्रयाग। केदारघाटी में हुई जलप्रलय ने लोगों को तोड़कर रख दिया है। केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड में लाखों, करोड़ों की लागत से होटल, रेस्टोरेंट और लॉज बनाए गए थे। वे स्वयं संपन्न तो थे ही। साथ ही सैकड़ों लोगों की आजीविका का माध्यम भी बने हुए थे। लेकिन सब जलप्रलय की भेंट चढ़ चुका है। रोजगार देने वाले खुद बेरोजगार हो चुके हैं। सीजन में लाखों का व्यवसाय कर अब बेसहारा हो चुके हैं। सारे कागजी दस्तावेज भी तबाही में स्वाह हो चुके हैं। इन हालातों में स्वयं को उभारना इन लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है।

भुखमरी की कगार पर पहुंचे होटल व्यवसायी
पीपलकोटी (चमोली)। चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की भूख मिटाने वाले होटल व्यवसायी आज खुद भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। यात्रा ठप पड़ होने से कई होटल, लॉज व्यवसायियों ने अपना व्यवसाय समेट लिया है। पीपलकोटी, मायापुर, भकुंडा, गडोरा, पाखी, बिरही और हेलंग में स्थित होटल मालिकों ने प्रदेश सरकार से आर्थिक सहायता दिए जाने की गुहार लगाई है।
होटल मालिक शरद गैरोला, मुकेश गैरोला, विजय पंत, देवेंद्र नेगी, सुदर्शन शाह, कैलाश बिष्ट, बीएस पंवार, हरीश पंत, रूप सिंह गुसाईं, जगत किशोर डिमरी, धर्म सिंह भंडारी, प्रकाश चंद्र शाह आदि ने कहा कि वे यात्रा से पूर्व बैंक से ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर देते हैं। छह माह की यात्रा के दौरान ही बैंक के ऋण को चुकता करना होता है। पीपलकोटी के होटल मालिक सुदर्शन शाह ने कहा कि उन्होंने बैंक से 40 लाख का ऋण लिया है। वे प्रतिमाह 40 हजार रुपये किस्त देते हैं। अब यात्रा ठप होने के बाद ऋण भुगतान कैसे करें।

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