
सितारगंज। बाढ़ जोन सितारगंज में राहत कार्यों के लिए डिवीजन कार्यालय तो खोल दिया गया, पर अफसरों की नियुक्ति वहां की गई, जहां काम ही नहीं है। बाढ़ राहत कार्यों में अफसरों को लगाने के बजाय उन्हें सिंचाई की माइनर नहरों की ड्यूटी पर लगा दिया। बाढ़ राहत कार्यों में लापरवाही की वजह कमीशनखोरी का खेल है। इस खेल में दून में बैठे विभागीय उच्चाधिकारियों की भी सांठगांठ बताई जाती है। शासन से रुद्रपुर में सर्किल की स्थापना के आदेश के बाद भी विभागीय उच्चाधिकारी अंजान बने हैं।
बाढ़ जोन सितारगंज में हर वर्ष नदियां कहर बरपाती हैं और इस बाढ़ जोन क्षेत्र को नदियों की तबाही से बचाने के लिए शासन की ओर से प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसी के तहत एक जून को यहां सिंचाई विभाग का डिवीजन कार्यालय खोला गया। सितारगंज-खटीमा डिवीजन में बाढ़ राहत कार्यों के लिए एक अधिशासी अभियंता की नियुक्ति की गई। जो वर्तमान में मेडिकल अवकाश पर हैं और उनका चार्ज ईई डीएस कछुवाहा संभाल रहे हैं। डिवीजन कार्यालय में तैनात तीन एई और छह जेई को 24 मई को उनके कार्य क्षेत्र आवंटित किए गए। सितारगंज के बीएस बिष्ट को प्रथम सहायक अभियंता, जेपी सेमवाल को द्वितीय व हरिओम सिंह चौहान को तृतीय सहायक अभियंता बनाया गया। जब तक ये अधिकारी काम शुरू करते कि 30 मई को इन तीनों सहायक अभियंताओं व छह जूनियर अभियंताओं को संबद्ध कर दिया गया और उसके बाद 22 जून को डिवीजन में संबद्ध छह जेई को नहरों की ड्यूटी में लगा दिया गया। कई माह पूर्व शासन से रुद्रपुर में सिंचाई विभाग सर्किल स्थापित किए जाने के आदेश के बाद भी सर्किल की स्थापना नहीं हुई। जिससे ऊधम सिंह नगर के सितारगंज, काशीपुर व रुद्रपुर डिवीजन को अभी भी नैनीताल सर्किल के अधीन ही काम करना पड़ रहा है।
शहर समेत चार गांवों में आई बाढ़ का जिम्मेदार वन विभाग है। वन उच्चाधिकारियों से प्रशासनिक अफसरों की वार्ता के बाद भी उन्होंने तटबंध मरम्मत में लगने वाले कट्टों के लिए मिट्टी नहीं उठाने दी और काम बंद करा दिया। इस पर सिंचाई विभाग द्वारा तटबंध मरम्मत में 25 हजार कट्टे ही लगाए जा सके। बृहस्पतिवार की सुबह तटबंध इसी जगह से टूट गया। एसडीओ बीएस बिष्ट ने बताया कि झाड़ी गांव को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध की मरम्मत व उसे ऊंचा किया जाना था। इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा सप्ताह भर पूर्व कट्टे लगाने का काम शुरू कर दिया गया। लेकिन वन क्षेत्राधिकारी बीके पांडे ने नदी किनारे वन भूमि बताते हुए मिट्टी उठाने का काम रुकवा दिया। सूचना पर एसडीएम मनीष कुमार ने रेन्जर व डीएफओ से बात भी की, पर वे नहीं माने। अंतत: विभाग ने नदी से ही मिट्टी खुदान कर कट्टे लगाने आरंभ कर दिए और छह दिन के भीतर 25 हजार कट्टे लगाकर तटबंध ऊंचा भी किया गया। जब तक तटबंध का कार्य पूरा होता कि रातभर पहाड़ में भारी बारिश यहां कहर बनकर टूट पड़ी।
