
चंपावत। क्या पिथौरागढ़ और बागेश्वर के मौसम का असर चंपावत जिले पर पड़ता है? आपदा प्रबंधन विभाग अब इस नजरिए से भी आकलन में लगा हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ज्यादा बारिश हुई तो चंपावत जिले के सीमावर्ती इलाकों पर उसका असर पड़ता है। साथ ही शारदा का जल स्तर बढ़ने पर भूकटाव की समस्या सामने आने लगती है।
जिला आपदा प्रबंधन विभाग अब हर रोज पिथौरागढ़ तथा बागेश्वर के मौसम की स्थिति, वहां होने वाली बारिश की मात्रा, सड़कों के बंद होने संबंधी रिपोर्ट को भी एकत्र कर रहा है। आमतौर पर चंपावत जिला आपदा की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील की श्रेणी में नहीं है। फिर भी यदि पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश होती है तो उससे नेशनल हाईवे के बंद होने का खतरा बढ़ जाता है। महाकाली नदी का जल स्तर बढ़ने पर वह टनकपुर में शारदा में मिलने के बाद तबाही का रूप ले सकती है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडे ने बताया कि अब रोज पिथौरागढ़ तथा बागेश्वर जिले से भी मौसम का अपडेट लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से टनकपुर का इलाका ही संवेदनशील है। वहां पर शारदा का जल स्तर बढ़ने पर कटाव की समस्या पैदा होती है। जिला नियंत्रण कक्ष में मुख्य रूप से सड़कों की स्थिति, बारिश से होने वाले नुकसान, नदियों के जल स्तर के आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं।
