मोटी तनख्वाह, काम नहीं कामचोरी

रुद्रपुर। जिले के विकास के लिए विकास भवन में योजनाएं तैयार की जाती हैं। जनता की कई समस्याओं का हल भी इसी भवन से निकलता है। इसलिए यहां बैठने वाले अफसरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। इनसे जनता की भी तमाम उम्मीदें बंधी होती हैं। जिलेभर से लोग इस आस के साथ आते हैं कि विकास भवन से कुछ रास्ता जरूर निकल जाएगा। मगर मोटी तनख्वाह लेने वाले अफसरों को जनसरोकार और विकास योजनाओं से कोई लेना देना नहीं है। यदि ऐसा नहीं तो साढ़े दस बजे तक अफसरों की सीट खाली नहीं मिलती। चौंकाने वाली बात यह है कि 19 अफसरों में से दस बजे ऑफिस में सिर्फ तीन अफसर ही मिले। साढ़े दस बजे एक और साहब कुर्सी पर पहुंच गये। इसके बाद भी 15 अफसरों का पता नहीं था।
अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार को विकास भवन का जायजा लिया। आफिस खुलने का समय सुबह दस बजे निर्धारित है मगर 19 अफसरों में से डीडीओ, पीडी, डीपीओ ही अपनी सीट पर मिले। बाकी अफसरों की कुर्सी खाली थी। जबकि डीपीआरओ, मुख्य कृषि अधिकारी और जिला युवा कल्याण अधिकारी का ऑफिस खुला ही नहीं था। साढ़े दस बजे लघु सिंचाई विभाग के ईई पहुंचे, बाकी 15 अफसरों का अब भी पता नहीं था। मत्स्य पालन विभाग का तो और भी बुरा हाल था। आफिस में एक कर्मचारी को छोड़कर साढ़े दस बजे तक कोई भी कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंचा था। अफसरों की मनमानी का कर्मचारी भी फायदा उठा रहे हैं। विकास भवन के अधिकांश बाबुओं की सीट भी साढ़े दस बजे तक खाली रहती है। अफसरों और कर्मचारियों की मौज से विकास योजनाएं तो प्रभावित हो रही हैं साथ ही जनता भी परेशान है। जिलेभर से रोजाना सैकड़ों लोग यहां काम के लिए पहुंचते हैं। अफसरों की राह में उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ को बिना काम हुए वापस लौटना पड़ता है।

Related posts