
हल्द्वानी। जनसंख्या एक वैश्विक समस्या है और यह कभी घटती नहीं, बल्कि हमेशा एक पायदान ऊपर रहती है, लेकिन उससे भी बढ़ा संकट सुविधा संपन्न शहरों या फिर इन शहरों की सीमा से लगे गांवों में बेतहाशा बढ़ रही आबादी है। क्योंकि जिस तेजी से बसासत का दबाव बढ़ता है, सुविधाएं उतनी ही सिकुड़ती हैं। बात अगर सिर्फ नैनीताल जिले की करें तो दस वर्ष पूर्व 7 लाख 62 हजार 909 की आबादी को समेटे जिले की आबादी का ग्राफ एक दशक के भीतर एक लाख 91 हजार ऊपर चढ़ा है।
हल्द्वानी और रामनगर आबादी के मामले में सबसे आगे हैं। इस भारी भरकम बसासत के पीछे पहाड़ के उन दुर्गम गांवों का पलायन भी है और साथ में दूसरे शहरों से आकर जिले में अपना कुनबा बनाने वाले लोग भी। क्योंकि पहाड़ के वही गांव खाली होकर शहरों की आबादी में शामिल हुए हैं जहां न पढ़ने के लिए स्कूल हैं न सेहत के लिए अस्पताल। सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के आधार पर सबसे ज्यादा 3.64 लाख लोग हल्द्वानी तहसील के शहर/ग्रामीण में रहते हैं। जबकि सबसे कम 13 हजार 836 लोग धारी तहसील में।
एक नजर जनगणना के आंकड़ों पर
2011 की जनगणना के आधार पर जिले की कुल आबादी 954605 है। इनमें 582871 लोग ग्रामीण और 371734 शहरी क्षेत्रों में आते हैं। पुरुषों की संख्या 493666, महिलाओं की 460939 है। हल्द्वानी तहसील में 244886 ग्रामीण,119243 शहरी आबादी में 189640 पुरुष और 174489 महिलाएं हैं। इसी तरह रामनगर तहसील में कुल 153738 लोगों में से 98951 ग्रामीण और 54787 शहरों में बसते हैं। यहां पुरुषों की तादाद 78928 और महिलाओं की 74810 है। नैनीताल तहसील के 150389 लोगों में से 78365 ग्रामीण तथा 93583 शहरों में आते हैं। कालाढूंगी तहसील-60070, कोश्यां कुटौली में 31557, बेतालघाट में 21265, धारी में 13836 लोग बसे हैं। सांख्यिकी विभाग के उपनिदेशक सुंदरलाल का कहना है कि नई जनगणना में पर्वतीय क्षेत्रों की आबादी में अंतर आया है।
