
नई टिहरी। टिहरी जिले में भले ही आपदा का अभी तक कोई खास असर नहीं है, लेकिन लगातार बिगड़ रहे मौसम और आपदा की आहट से डौंर, आगर, घिघुड़, कंडारी, भितली व स्यूड़ गांव के लोग दहशत में हैं। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उक्त गांव के लोगों की हर बारिश के साथ धड़कने बढ़ रही हैं। गांवों में लगातार भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है।
2011 में डौंर गांव में भूस्खलन के कारण छह लोग जिंदा मलबे में दफन हो गये थे। वर्ष 1999 में आए भूकंप के बाद से आगर गांव का एक हिस्सा लगातार धंस रहा है। भूगर्भीय सर्वेक्षण होने पर भी गांव के विस्थापन का मामला 14 सालों से फाइलों में लंबित पड़ा है। इसी दौरान स्यूड़ गांव में भूकंप से आठ आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हुए थे। वर्ष 2005 में कंडारी व भितली गांव में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। यही दास्तां 500 की आबादी वाले घिघुड़ गांव की है, जहां गांव के ऊपर भारी बोल्डर अटके हुए हैं जो कभी भी तबाही मचा सकते हैं। गांव के ऊपर लगातार भूस्खलन हो रहा है।
इनका क्या है कहना
भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील डौंर, आगर, घिघुड़, कंडारी, भितली व स्यूड गांव का जल्द विस्थापन होना चाहिए। जब गांवों की भूगर्भीय रिपोर्ट आ चुकी है, तो शासन किस बात का इंतजार कर रहा है।
-वीरेंद्र सिंह कंडारी, जिला पंचायत सदस्य
भूस्खलन प्रभावित गांवों के विस्थापन का मामला शासन स्तर पर लंबित है। शासन से नीति घोषित होने के बाद ही गांवों का विस्थापन किया जा सकेगा।
-प्रवेश चंद्र डंडरियाल, एडीएम टिहरी
