
कर्णप्रयाग/थराली। कहते हैं शिक्षक समाज का मार्गदर्शक होता है। इसे सार्थक साबित किया है थराली शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य जयपाल सिंह और उनके सहायक अध्यापक विजय सिंह नेगी ने। इन्होंने स्वयं ही स्कूल भवन से मलबा हटाया।
बाढ़ से थराली के सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण को अपने आगोश में ले लिया था। नदी के साथ आए मलबे में विद्यालय की पूरी सामग्री तहस-नहस हो गई थी। जब 18 जून को प्रधानाचार्य ने स्कूल को देखा, तो स्कूल पूरी तरह रेत से ढका था। विद्यालय का सारा सामान और अभिलेख मलबे में दबे थे। उन्होंने बिना समय गंवाए बेलचा, फावड़ा, गैंती और एक बोरी की पल्ली बनाकर स्वयं मलबे को खोदकर हटाना शुरू कर दिया। इस कार्य में उनका साथ दिया स्कूल के ही सहायक अध्यापक विजय नेगी ने।
शिक्षक जयपाल सिंह बताते हैं कि पहले दिन तो जरा हमारा आत्म विश्वास डिगा, लेकिन साथी ने हाथ बढ़ाया और 10 दिन में हमने छह कमरों में से तीन मलबे से खाली कर दिए थे। फिर प्रबंध समिति ने हमारे साथ दो मजदूर भेजे, जबकि प्रबंध समिति के अध्यक्ष खीमानंद और कुछ महिलाओं ने भी एक दिन हमारे साथ श्रमदान किया। तब से हमने 20 दिन में स्कूल के छह कमरों को साफ कर दिया और जब तक स्कूल खुलता है तब तक स्कूल मैदान में जमा मलबे को भी एक तरफ कर दिया जाएगा। वर्ष 1988 में स्थापित उक्त विद्यालय में तहसील मुख्यालय के 300 से अधिक नौनिहाल पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य जयपाल सिंह ने कहा कि स्कूल भवन खाली करने के बाद अब चुनौती यहां नष्ट हुई सामग्री को पुन: जोड़ना है, जिसके लिए भी योजना बनाई जाएगी।
