सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार सहमत

सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार सहमत

नई दिल्ली: सरकार का मानना है कि कि दो साल या उससे अधिक जेल की सजा पाए सांसदों-विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से किसी को बुनियादी तौर पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए हालांकि इसके तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही इस निर्णय पर ठोस रूप से कुछ कहा जा सकता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा .. बुनियादी तौर पर किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए हां कुछ तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किये जाने के बाद ही ठोस रूप से कुछ कहा जा सकता है। .. उन्होंने कहा कि सरकार का इस पर क्या रूख है यह कहना अभी जल्दबाजी होगी क्योंकि विधि मंत्रालय तकनीकी बारीकियों का अध्ययन कर रहा है लेकिन पहली नजर में यह कहा जा सकता है कि बुनियादी तौर पर किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जाति आधारित राजनीतिक बैठकों तथा रैलियों पर रोक लगाने के निर्णय से जुडे सवाल पर भी उन्होंने कहा कि यह निर्णय अभी आया है और इसका अध्ययन करने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय बेहद गंभीरता से और हर पहलू को सोचकर निर्णय देता है इसलिए कुछ कहने से पहले इसका अध्ययन भी उतनी ही बारीकी से किया जाता है। राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखने के बारे में उन्होंने कहा कि जब यह कानून बनाया गया तो सांसदों की मंशा यह नहीं थी। यदि ऐसा होता तो इसका प्रावधान उसी समय कानून में किया जाता।

मंत्रिमंडल में चुनावों को देखते हुए निर्णय लिये जाने और भारतीय जनता पार्टी की आम चुनाव जल्द कराने की आशंका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भाजपा 2004 से ही चुनाव का इंतजार कर रही है क्योंकि वह अपनी हार को पचा नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि आम चुनाव पांच वर्ष के बाद होते हैं और हर सरकार को उसका कार्यकाल पूरा करने दिया जाना चाहिए।

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