कांगड़ा की सीमा पर मलेरिया का हमला!

धर्मशाला। कांगड़ा जिला के सीमांत इलाकों में मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है। रोजाना नजदीकी अस्पतालों में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बीमारी से निपटने के लिए विभाग जल्द ही जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रहा है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया और डेंगू से निपटने के लिए तमाम दवाइयां अस्पतालाें को भेज दी है। इसके अलावा बीएमओ को भी दवाइयों के लिए स्वीकृत बजट का 15 प्रतिशत हिस्सा जरूरी दवाइयाें पर खर्च करने की अनुमति दे दी है। राशि पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने बीएमओ को भेज दी है।
सबसे ज्यादा दिक्कत मंडी, ऊना, चंबा और पठानकोट के बार्डर एरिया के आसपास के दूरदराज इलाकों में हैं, जहां मलेरिया से ग्रस्त मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। कुछेक सीरियस मरीजों को सीएचसी स्तर के अस्पतालों में भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि सीमाओं पर बसे दूरदराज के गांवों के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण भी बीमारी फैल रही है। मच्छरो के काटने के बाद लोग एक के बाद एक मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं। सीमांत इलाकों में विभाग के सब सेंटर तो हैं, मगर स्टाफ नहीं है। साथ ही दोनों जिलों की ओर से रोगों की रोकथाम के लिए चलाए गए तमाम प्रयास भी विफल रहे हैं। यहां तक इन क्षेत्रों मेंस्वास्थ्य विभाग की टीमें भी नहीं पहुंच पाती।
उधर, सीएमओ डा. ध्रुव एस गुरुंग ने बताया कि सीमांत इलाकों में मलेरिया ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। बीमारी पर काबू पाने के लिए दवाइयां भेज दी गई है। यह इलाके जिला की सीमाओं के साथ सटे हैं और काफी दूरदराज इलाके हैं।
डा. राकेश शर्मा ने कहा कि घर के आसपास बरसात के मौसम में पानी इकट्ठा न होने दें। उन्होंने कहा कि पानी इकट्ठा होने पर ही मच्छर पैदा होते हैं। मच्छरों के काटने से ही मलेरिया होता है। रुके पानी के आसपास केरोसिन डालें। बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं।

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