
धर्मशाला। ग्रामीण इलाकों में कई झोलाछाप डाक्टर बिना डिग्री के लोगों की जिंदगी को दांव पर लगाकर चांदी कूट रहे हैं। ऐसे चिकित्सकों ने ग्रामीण इलाकों और शहराें में अपने क्लीनिक खोल रखे हैं। बिना डिग्री क्लीनिक चलाने पर जिला के दो झोलाछाप चिकित्सकों की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है। धर्मशाला कोर्ट ने दोनों चिकित्सकों को बिना डिग्री क्लीनिक चलाकर इलाज करने पर सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
जानकारी के मुताबिक सुरजीत सिंह और अवतार सिंह लंबे समय से बिना डिग्री के ही दवाइयां बेच रहे थे। दोनों के खिलाफ सीजीएम कोर्ट धर्मशाला में मामला चला। इस दौरान कोर्ट ने सुरजीत सिंह को एक साल की कैद और दो हजार रुपये जुर्माना, जबकि अवतार सिंह को एक साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है। ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा ने इसकी पुष्टि की है। उधर, जिला भर से आठ झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा क्लीनिक खोले जाने संबंधी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची है। इनसे इलाज करवाकर लोगों की तबीयत बिगड़ गई। ड्रग इंस्पेक्टर ने शिकायत मिलने के बाद झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चिकित्सक बिना डिग्री के क्लीनिक चला रहे हैं। निजी अस्पतालों में थोड़ी बहुत जानकारी हासिल करने के बाद चिकित्सकों ने अपने क्लीनिक ग्रामीण और शहरी इलाकों में खोल दिए हैं।
उधर, ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा ने बताया कि जिलेभर में आठ के करीब झोलाछाप चिकित्सक अपने क्लीनिक चला रहे हैं। चिकित्सकों के बारे में शिकायतें लिखित तौर पर मिली हैं। ऐसे चिकित्सकों की सजा हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है।
