जन औषधीय केंद्र में नहीं दवाएं

सोलन। रोगियों को सस्ती दवाएं उपलब्ध करवाने की योजना मात्र दो वर्षों में ही हांफ गई। शुरूआती दौर में प्रदेश में 14 जन औषधी केंद्र खोलने की योजना थी, दस केंद्र वर्ष 2011 में खोले गए जिसमें से पांच केंद्र बंद हो चुके हैं, बचे हुए केंद्र बंद होने के कगार परे हैं।
मौजूदा समय में मात्र पांच केंद्र ही चल रहे हैं। इनमें सोलन जिला समेत हमीरपुर, धर्मशाला, मंडी व टांडा मेडिकल कालेज शामिल हैं। इनमें भी दवाओं का भारी टोटा चल रहा है। इसमें मात्र 20 से 50 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। सस्ती दवाएं मुहैया करवाने की केंद्र सरकार की योजना पूरी तरह से फेल होती नजर आ रही है। रोगियों को जेब ढीली करके महंगे दामों पर बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है।

जीवन रक्षक दवाओं का रहा टोटा
प्रदेश में जन औषधी केंद्र खोले गए थे तो इसमें 319 प्रकार की दवाएं रखने का प्रावधान किया गया था। इसमें लोगों को 30 से 90 फीसदी तक सस्ती दवाएं देने की योजना था। मगर योजना शुरूआत से ही लचर अवस्था में दिखाई पड़ी। इसमें शुरू से ही करीब 120 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हो सकी। इसके अतिरिक्त जीवन रक्षक दवाओं का इनमें टोटा रहा। इसके चलते रोगियों को निजी मेडिसिन शाप पर ही निर्भर रहना पड़ा।

दवाएं न मिलने से योजना विफल
इस बारे में जन औषधी केंद्र होल्डर सोलन महेश शर्मा व हमीरपुर अश्विनी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाएं न मिलने से योजना फेल हो रही है। उनका कहना है कि उन्हें दवाएं उपलब्ध करवाने का काम रोगी कल्याण समीति का है, आर्डर देने के बाद भी उनके पास दवाएं नहीं पहुंच पा रही। वहीं रोगी औषधी केंद्र पर आकर उन्हें प्रताड़ित करते हैं।

Related posts