
शिमला। किसी भी अस्पताल की रीढ़ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं होती हैं, लेकिन आज तक आईजीएमसी में अलग से आपातकालीन विभाग नहीं बन पाया। विभाग बनने से इमरजेंसी और ट्रॉमा यूनिट होती, अलग से प्रोफेसर और उनकी टीम भी होती। लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इतना जरूर है कि आईजीएमसी प्रशासन ने आपातकालीन वार्ड को नए प्रस्तावित ओपीडी भवन में शिफ्ट करने की स्वीकृति दे दी है। इसमें एक पूरे फ्लोर पर वार्ड चलेगा और मरीजों को बेहतर उपचार मिल पाएगा।
मौजूदा समय में आपातकालीन वार्ड राम भरोसे चल रहा है। किसी भी विभाग की इसको लेकर कोई सीधी जिम्मेदारी नहीं है। प्रबंधन की ओर से सीएमओ (कैजुअल्टी मेडिकल अफसर) तैनात किए गए हैं। जो मरीज के यहां आने पर सबसे पहले चेक करते हैं, उसके बाद संबंधित विभाग के डाक्टर के सुपुर्द कर देते हैं। कई मर्तबा डाक्टर को कॉल कर बुलाना पड़ता है क्योंकि हर विभाग के डाक्टर यहां नहीं बैठते। एमबीबीएस और पीजी स्टूडेंट के हवाले ही आपातकालीन वार्ड रहता है। कोई गंभीर मामला आने पर ही कंसलटेंट को फोन किया जाता है। इस प्रक्रिया में काफी वक्त बर्बाद हो जाता है। मरीज की जान को खतरा पैदा हो जाता है। मेडिसन विभाग के प्रोफेसर डा. राजेश कश्यप कहते हैं कि अगर आपातकालीन विभाग स्वतंत्र बना दिया जाए, तो इससे जुड़ी समस्याएं हल हो जाएंगी। यहां पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स शुरू हाें। अन्य विभागों की तरह यहां पर भी प्रोफेसरों की टीम सहित पैरा मेडिकल स्टाफ रहेगा। उधर, कॉलेज प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि अलग से विभाग तो नहीं बनाया जा रहा, लेकिन आपातकालीन वार्ड को नए भवन में शिफ्ट करने की मंजूरी दी मिल गई है। भवन बनते ही यह हो जाएगा।
