अज्ञात बीमारी से किसानों के होश फाख्ता

शाहतलाई (बिलासपुर)। शाहतलाई क्षेत्र के दसलेहड़ा, नघ्यार और अन्य कई गांवों के किसान बैकफुट पर आ गए हैं। बीटल रोग से पहले की मक्की कई जगह पर तबाह हुई है। अब नई बीमारी ने किसानों के होश फाख्ता कर दिए हैं। अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से कई बीघा भूमि पर बीजी गई मक्की की फसल सूखी घास में तबदील हो गई है। बताया जा रहा है कि किसानों ने मक्की का बीज कृषि विभाग से खरीदा था। ऐसे में अब बीज की क्वालिटी को लेकर भी प्रश्न उठने लगे हैं। विभागीय अधिकारियों ने मौके का दौरा करने की बात कही है।
मक्की की फसल पर सफेद, पीले रंग के दाग पड़ रहे हैं। मक्की फसल पर बीमारी आने से किसान चिंतित हो गए हैं। मक्की की फसल पर लगी इस बीमारी पर असमंजस बना हुआ है। किसान असमंजस में है कि बीमारी मौसम की मार के कारण फैली या फिर कृषि विभाग द्वारा दिए गए बीज की क्वालिटी में खोट है। दसलेहड़ा सब्जी उत्पादक समिति के अध्यक्ष योगेंद्रपाल, कर्मचंद, राजेश कुमार, कश्मीरी लाल, निलेश कुमार, विशेश्वर दास, लेखराज, नघ्यार के मूलराज, उत्तम चंद शर्मा, राजकुमार, नीलम कुमारी, व्यासा देवी, किशोरी लाल ने कहा कि इस बार समय पर बारिश होने से किसानों को अच्छी फसल होने की उम्मीद थी। लेकिन क्षेत्र में मक्की की पौध पर अचानक सफेद दाग, पौधे का पीला होना के चलते उन्हें चिंता हो रही है कि उन्हें नुकसान नहीं उठाना पड़े। वहीं इस बीमारी के चलते मक्की की फसल का पत्ता सिकुड़ने के कारण सूखना शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जो बीज कृषि विभाग के माध्यम से खरीदा है। उस पर अधिक बीमारी का प्रभाव है। देशी बीज पर बीमारी का कम असर देखा गया है। कृषि विशेषज्ञों ने बीज खरीदते समय इस बीज को ट्रीट करने का का दावा किया था। उप निदेशक जीसी लखनपाल ने कहा कि उनके पास अभी तक इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं आई है लेकिन यदि फिर ऐसी कोई बीमारी है तो जल्द ही विशेषज्ञों की टीम क्षेत्र का दौरा करेगी।

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