
बैजनाथ (कांगड़ा) बरसात का मौसम उपमंडल के ऊपरी क्षेत्र के लोगों के लिए अधिकांश मौकों पर मुसीबतें ही लेकर आता रहा है। दयोल, फटाहर, उतराला, संसाल व मंडेढ गांव के लोगों के लिए 10 वर्षों में बरसात हमेशा कष्टदायी रही है।
गत 10 वर्षों में इस क्षेत्र में बरसात के मौसम में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौतें हो चुकी हैं जबकि एक दर्जन से अधिक पालतू पशु पानी के तेज बहाव का शिकार हो चुके हैं। 2001 में लुण्णी खड्ड में बाढ़ आने के कारण करोड़ों का नुकसान हुआ था। उसके उपरांत जलग्रां में भारी तबाही हुई थी तथा इस घटना में गांव के एक दर्जन से अधिक घर, गौशालाएं तथा तीन जानवर पानी में बह गए थे। सात वर्ष पूर्व संसाल के मतरुंह गांव का मंजर देख कर लोग सन्न रह गए थे। गांव में बादल फटने से जमीन पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी और एक परिवार के चार लोग घटना का शिकार हुए थे। वहीं तीन वर्ष पूर्व मडेढ़ गांव में बादल फटने के जख्म अब तक नहीं भर सके हैं, उस समय आधा दर्जन पालतू पशु पानी में बह गए थे। छह माह पूर्व उतराला के परेई नाले में आधा दर्जन से अधिक भेडे़ं तेज बहाव की चपेट में आ गई थीं। क्षेत्र के लोगों को कहना है कि दयोल फटाहर और उतराला के उपरी क्षेत्र में आधा दर्जन विद्युत परियोजना के निर्माण के कारण जमीन और जंगल खोखले हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतने कड़वे अनुभव होने के बावजूद अब तक आपदा को लेकर प्रशासन की तैयारियां नाकाफी नजर आ रही हैं।
आपदा से निपटने की पूरी तैयारी
वहीं, एसडीएम ओपी ठाकुर का कहना है कि आपदा से निपटने के लिए पूरी तैयारी है। आपदा के समय लोग 01894-263656 नंबर पर 24 घंटे संपर्क कर सकते हैं और समस्त विभागों के अधिकारियों को सचेत रहने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
