प्रदेश सरकार के पास फंसा तीन करोड़ : चौहान

रोहडू। प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब की राशि का भुगतान अभी तक बागवानों को नहीं किया है। जबकि, वर्ष 2012 में एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब का भुगतान तीन करोड़ रुपये बनता है। यह जानकारी प्रेस को जारी बयान में फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के महासचिव हरीश चौहान ने दी। चौहान ने बताया कि हिमफेड को 1.40 करोड़ तथा एचपीएमसी को 1.60 करोड़ रुपये का भुगतान बागवानों को करना है। लेकिन, सेब की बकाया राशि के भुगतान के लिए अभी तक कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि, वर्ष 2010 में एमआईएस के तहत रिकार्ड 58 करोड़ रुपये का सेब खरीदा गया था, जिसका भुगतान पूर्व सरकार ने समय पर कर दिया था। उन्होंने बताया कि महंगाई के दौर में सेब तथा आम के समर्थन मूल्य में मात्र 50 पैसे प्रतिकिलो की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। बागवानों को समय पर सेब की आवश्यक दवाइयां नहीं मिल रही हैं। बागवानों को मजबूरन बाजार से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इसलिए समय पर उद्यान केंद्रों में अनुदान पर मिलने वाली आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएं। उन्होंने मांग उठाई कि सेब बागवानों के लिए मिट्टी के तेल के कोटे का अलग से प्रावधान भी किया जाए। अधिकांश बागवान बगीचों में स्प्रे करने की मशीनों में मिट्टी के तेल का इस्तेमाल करते हैं। समय पर मिट्टी का तेल उपलब्ध न होने के कारण बागवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Related posts