उत्तराखंड ‘हरित जीडीपी’ से करेगा संसाधनों का निरिक्षण

उत्तराखंड ‘हरित जीडीपी’ से करेगा संसाधनों का निरिक्षण

नयी दिल्ली: शुक्रवार को उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जो ‘सकल पर्यावरण उत्पाद’ या ‘ग्रोस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट’ (जीईपी) की सारणीबद्ध जानकारी की शुरुआत करेगा। जीईपी के द्वारा राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी व उनकी स्तिथि को मापा जाएगा जीसी प्रति वर्ष जारी होने वाले जीडीपी के आंकड़ो के साथ जारी किया जाएगा।

मुख्य मंत्री विजय बहुगुणा ने अपने अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि नए हरित मापक को लागू करने के लिए काम शुरू कर दिया जाए जिससे राज्य के ग्लेशियर, जंगलों, नदियों, वायु की उत्कृष्टता, भूमि आदि संसाधनों की सालाना स्तिथि का पता चल सके।

प्राप्त आंकड़े संरक्षण नीतियों में बेहद लाभकारी साबित होंगे और साथ ही राज्य के पर्यावरण में हो रही छेड़छाड़ व राज्य में होने वाली आर्थिक स्तिथियों का भी पता चल सकेगा। पिछले महीने केदारनाथ व साथ के कई इलाकों में हुए भारी नुकसान को देखते हुए ये कदम उठाने की पहल की गयी है क्योंकि इसके बाद राज्य को पर्यावरण को दरकिनार कर विकास को तरजीह देने जैसी कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

मुख्य मंत्री बहुगुणा ने नए हरित मापक की घोषणा पर्यावरण गतिविधियों में सक्रिय अनिल जोशी के साथ हुई बैठक के बाद की जिनकी संस्था हेस्को पिछले कई समय से इसकी मांग कर रही थी। जोशी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है जिसका अनुसरण अन्य राज्यों को भी करना चाहिए।

उत्तराखंड सरकार ने ने इस घोषणा सम्बन्धी सूचना जारी करते हुए कहा कि राज्य पर्यावरण मंत्रालय के साथ केन्द्रीय अधिकारी जीईपी के आंकड़ों को एकत्रित करने में सहयोग करेंगे।

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