
शिमला। हादसे में घायल युवक की इलाज के अभाव में हुई मौत के बाद आईजीएमसी में बवाल हो गया। क्रोधित लोगों ने तीन घंटे नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने शव को गेट पर रखा और गुस्सा निकाला। इनकी मांग थी कि स्वास्थ्य मंत्री खुद यहां आएं और अव्यवस्था को देखें।
हादसे में उन्नीस वर्षीय केश्व ठाकुर की मौत हुई है। केश्व मूल रूप से नैनादेवी बिलासपुर का रहने वाला था। यहां कसुम्पटी परिमहल में परिवार के साथ रह रहा था। शुक्रवार सुबह करीब दस बजे अपने दोस्त के साथ गाड़ी में मल्याणा की ओर गया था। यहां सड़क किनारे बैलरो कैंपर नाली में फंसी हुई थी। इसका चालक मदद मांग रहा था। इसी दौरान केश्व ठाकुर गाड़ी को धक्का दे रहा था। अचानक गाड़ी पीछे हुई और केश्व चपेट में आ गया। उसका सिर पहाड़ से टकरा गया। मौका देखते ही बैलरो कैंपर चालक गाड़ी समेत फरार हो गया।
केश्व के साथी उसे आईजीएमसी ले आए। करीब ग्यारह बजे अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें गाड़ी नहीं लगाने दी गई। चालक गाड़ी लेकर बाहर गया। तब तक दूसरा युवक परची बनाने के काउंटर पर पहुंचा। यहां लंबी लाइनें लगी हुई थी। लाइनों में खड़े मरीजों से प्रार्थना करने के बाद की उनका मरीज बुरी तरह से घायल हुआ है, तो उन्हें पहले परची बनाने दी गए। इसी बीच काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने कहा कि यहां सभी को इमरजेंसी है लाइन में आओ। करीब सताइस 27 मिनट बाद परची बनी, पर डाक्टर ने समय पर युवक को नहीं देखा। जब तक डाक्टर आए तब तक युवक ने दम तोड़ दिया था।
मौत की खबर सुनने के बाद केश्व के परिचित एकत्रित होने लगे और करीब तीन बजे से लेकर छह बजे तक नारेबाजी करते रहे। इनकी मांग थी कि स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह यहां आए और आईजीएमसी में फैली अव्यवस्था को खुद देखें कि कैसे यहां आम मरीज तिल तिल मर रहा है। प्रदर्शनकारियों सूरज, मनीष, हिमेंद्र, सुरेंद्र, महेश, नरेंद, अमित, हरीश, अनिल का कहना था कि आईजीएमसी में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार होता है। प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीज दम तोड़ रहे हैं। जब कोई मरीज इस बात का विरोध करता है तो सभी डाक्टर और अन्य कर्मचारी मारपीट का झूठा मामला बनाकर हड़ताल पर चले जाते हैं। हर बार मरीजों या उनके तीमारदारों को ही गलत ठहराया जाता है।
