
कोटखाई (शिमला)। यहां इंश्योरेंस कंपनी ने सैकड़ों बागवानों के बीमे रद कर दिए हैं। कंपनी की दलील है कि बागवानों ने बीमा संबंधी कई औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया है। इसके चलते इनके बीमे रद किए गए हैं। उधर, बागवानों का कहना है कि कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में बागवानों से सेब का बीमा करने के नाम पर 20 से लेकर 40 रुपये प्रति पौधा वसूल किए थे। लेकिन, जब अब नुकसान का मुआवजा देने की बात आई तो कंपनी बागवानों को यह कह कर पैसा लौटा रही है कि बागवानों ने बीमा के लिए औपचारिकताओं को पूरा नहीं किया है। बागवानों का कहना है कि इससे पहले कंपनी को औपचारिकताओं को पूरा करने के बारे में क्यों नहीं बताया गया? जबकि, बागवानों ने पैसा जमा करवाते वक्त ही सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया था। जब मुआवजा देने की बात आई तो कंपनी बागवानों के साथ छल करने पर उतर आई है। बागवानों ने साफ कर दिया है कि उन्हें बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा नहीं मिला तो वे कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर होंगे।
क्षेत्र के बागवानों में जगदीश चंदेल, इंद्र सिंह, खुशी राम, कीना, सुरमा धानी, राविंद्र, बालक राम, हुमा नंद, कंवर सिंह, रमेश चंद, शिव लाल, रोहित राजटा, रंधीर सिंह, राजेंद्र सिंह, लायक राम शर्मा ने प्रशासन और बागवानी विभाग से मांग की है कि कंपनी के खिलाफ बागवानों के साथ धोखा करने के लिए कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए नहीं तो बागवानों को मजबूरी में कोर्ट की शरण में जाना पड़ेगा। जेके रिस्क मैनेजर्स एंड इंश्योरेंस ब्रोकर्स कंपनी के प्रबंधक प्रवीन कुमार ने बताया कि बागवानों के कागजात पूरे न होने के कारण बीमा रद किया गया है। उन्होंने कहा कि कागजात पूरे न होने के कारण किसी भी बागवान के पौधों का बीमा नहीं किया जा सकता है।
