सांसद और प्रभारी मंत्री के गृह जनपद का हाल

पौड़ी। विकास खंड पोखड़ा की 57 ग्राम पंचायतें तीन ग्राम पंचायत अधिकारियों के जिम्मे है। स्टाफ के अभाव में क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। जन प्रतिनिधियों की मांग पर कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज और जनपद की प्रभारी मंत्री अमृता रावत का गृह विकास खंड क्षेत्र पोखड़ा। जनपद मुख्यालय से करीब सौ किलोमीटर से अधिक का सफर तय करने के बाद पोखड़ा ब्लाक की सीमा शुरू होती है। दूर दराज होने के कारण यहां के गांव बुनियादी सुविधाओं के अभाव में है। विकास योजनाओं की देखरेख के अलावा गुणवत्ता का जिम्मा ग्राम पंचायत अधिकारियों के पास होता है। मगर, 57 ग्राम पंचायताें वाले विकास खंड पोखड़ा में ग्राम पंचायत अधिकारियों के 16 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 6 पदों की ही तैनाती है। इसमें 6 से भी 3 वीडीओ लंबे समय से अस्वस्थता के कारण मेडिकल पर हैं। इन हालातों में ग्रामीण विकास की बात करना बेमानी है।
खुली बैठकों पर भी पलीता
पौड़ी। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम विकास अधिकारी की खुली बैठक में अहम भूमिका होती है। इन्हीं के हस्ताक्षर से योजनाओं के प्रस्ताव शासन को भेजे जाते हैं। वीडीओ की कमी के कारण शासन में प्रस्ताव नहीं भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा लोगों को परिवार रजिस्टर की नकल के लिए भटकना पड़ रहा है।-
वीडीओ की कमी के कारण बैठकों का एजेंडा भी तैयार नहीं हो पा रहा है। योजनाओं की एमबी न हो पाने से लोग अपने भुगतान के लिए ब्लाक के चक्कर काटते रहते हैं। सांसद व प्रभारी मंत्री भी अपने गृह क्षेत्र से मुंह फेरे हैं। – रामेश्वरी जोशी, ब्लाक प्रमुख पोखड़ा।

दो वर्ष से स्थानांतरण की प्रक्रिया न होने से व्यवस्थाएं जस की तस बनी हैं। ग्राम पंचायत अधिकारियों की कमी के कारण पंचायतों के कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। एक वीडीओ के जिम्मे दर्जनों पंचायतें होने से वर्कलोड बढ़ा है। रिक्त पदों पर तैनाती की व्यवस्था शासन स्तर का मामला है। – मयंक तिवारी, डीपीआरओ।

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