
चंपावत। वित्तीय वर्ष को प्रारंभ हुए तीन माह का समय बीत गया है, लेकिन अब तक जिला योजना में मात्र 16 करोड़ रुपये की राशि ही मिल पाई है। जबकि इस बार की जिला योजना 43.77 करोड़ रुपये की है। शासन से धन मिलने में देरी होने पर विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। इधर, आपदा का दौर शुरू हो जाने से कामों की वरीयता भी बदल गई है। एक तरफ सरकार की मंशा है कि विभिन्न योजनाओं के लिए मिलने वाले पैसे को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले खर्च कर दिया जाए। दूसरी तरफ शासन के स्तर से ही धन आवंटन में देरी की जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अब तक सबसे ज्यादा धनराशि लोनिवि को मिली है। जिला योजना में लोनिवि को 2.54 करोड़ रुपये का आवंटन हो चुका है। इधर, आपदा का दौर शुरू हो गया है। लोनिवि को पहली प्राथमिकता बंद सड़कों को खोलने में देनी है। ऐसे में जिला योजना के तहत प्रस्तावित काम शुरू होने में देरी हो सकती है। ठीक यही स्थिति जल निगम और जल संस्थान के सामने भी है। इन विभागों को भी जिला योजना का पैसा तो मिल गया है लेकिन बीते दिनों आपदा से क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत को ही ज्यादा तरजीह दी जा रही है। हालांकि जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्राप्त धन का उपयोग जुलाई के अंत तक कर लिया जाए। अब देखना है कि सरकारी मशीनरी इस पर कितना अमल कर पाती है। यदि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक जिला योजना का धन खर्च नहीं हो पाया तो हर बार की तरह इस बार भी धन के लैप्स होने का संकट पैदा हो जाएगा।
