नौ दिन बाद भी नहीं मिली हेलीकाप्टर में जगह

रानीखेत। सदर बाजार निवासी अग्रवाल परिवार भी बद्रीनाथ धाम की यात्रा के खट्टे मीठे अनुभव लेकर लौट आया है। यहां पहुंचने पर विनय अग्रवाल ने बताया कि आपदा स्थल से सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए 18 जून से 27 जून तक लाइन में लगने के बावजूद जब उन्हें हेलीकाप्टर में जगह नहीं मिली तो उनके परिवार को पत्थरों की बारिश के बीच पगदंडियाें में कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ी। उनके दोनों बच्चे काफी सहमे हुए नजर आए।
विनय कुमार अग्रवाल इन दिनों अंबाला स्थित नवोदय विद्यालय में कार्यरत हैं। वह अपनी पत्नी निलिमा, 18 वर्षीय पुत्री सौम्या और 13 वर्षीय पुत्र अभिलक्ष के साथ 15 जून को रानीखेत से बद्रीनाथ रवाना हुए। बद्रीनाथ पहुंचते ही आपदा ने घेर लिया। दो दिन होटल में बिताने के बाद 18 जून से वह सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए हेलीकाप्टर का इंतजार करने लगे। 27 जून तक लगातार लाइन में लगने के बाद भी उन्हें हेलीकाप्टर में जगह नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पैदल चलकर सुरक्षित स्थानों पर जाना मुनासिब समझा। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पैदल चलते वक्त वोल्डरों की बारिश हो रही थी, नजर चूकने पर सीधे खाई और नदी में गिरने का खतरा बना था। सेना के जवानों की मदद से उन्होंने यह बाधा पार की। अग्रवाल परिवार वहां रेस्क्यू अभियान चला रही भारतीय सेना के जवानों का शुक्रिया अदा करना नहीं भूला।

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