टुटू बाजार में मुश्किल से चार स्ट्रीट लाइटें

शिमला। टुटू बाजार मिल्कफेड से मुख्य चौक सड़क में जगह-जगह गड्ढे हैं। स्ट्रीट लाइटें न होने से रात को लोग अंधेरे में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। रेलवे लाइन से मज्याठ, शिवनगर से विजय नगर का रास्ता खस्ताहाल है। डंगे गिरे होने से रास्ते खतरनाक बन गए हैं। मुख्य बाजार में मुश्किल से चार ही लाइटें लगी हैं। लोअर टुटू सहित शिवनगर और दिव्य नगर सहित पूरे क्षेत्र में आधी लाइटें बंद पड़ी हैं। मुख्य बाजार से बंगाला कालोनी, लोअर टुटू तक केबल बिछाने के लिए सड़क किनारे खुदाई कर दी गई है। बारिश से नालियों में पानी भर गया है और वाहन चालकों को चलना मुश्किल हो गया है। यही नहीं, सड़क से बह रहा बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस रहा है।
डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन योजना भी यहां दम तोड़ रही है। मुश्किल से 60 फीसदी घरों से ही कूड़ा उठाया जा रहा है। 40 फीसदी घरों का कूड़ा अभी भी डंपरों के बाहर बिखरा पड़ा होता है। पार्षद निर्मला चौहान ने बताया कि वार्ड के सर्वे में 77 स्ट्रीट लाइटें लगाने का एस्टीमेट नगर निगम को दिया था, मगर अब मामला फाइलों में ही गुम है। बरसात से जगह जगह गिरे डंगों और स्ट्रीट लाइटें न होने से रास्ते खतरनाक हो गए हैं। स्ट्रीट लाइट के अभाव में टुटू मुख्य चौक पर हाई मास्क लाइट की मांग की थी, मगर हाई मास्क तो दूर अब तक पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें तक लोगों को नसीब नहीं। वहीं, कूड़ा एकत्रीकरण में लोगों का सहयोग कम मिल रहा है।
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नाममात्र स्ट्रीट लाइटें
स्ट्रीट लाइटें नाममात्र हैं। जो हैं, उनका रखरखाव सही ढंग से नहीं होता। टुटू मुख्य बाजार में ही मुश्किल से चार लाइटें हैं। रात को बाजार से गुजरना मुश्किल हो जाता है। – केशव वर्मा, रिटायर कर्मी

सड़क खोदकर छोड़ गए
सड़क किनारे केबल बिछाने के लिए खुदाई के बाद ऐसे ही छोड़ दिया गया है। रात को अंधेरे में पैदल चलने वालों को मुश्किल होती है। वाहन चालकों को भी दिक्कत होती है। – कपिल, कारोबारी

घरों में घुस रहा पानी
टुटू बाजार के साथ ही नालागढ़ सड़क पर खुदाई के बाद बिना टारिंग छोड़ी गई सड़क और नालियां न होने से बरसात के पानी से सड़क की हालत खराब है। पानी मकानों में भी घुस रहा है। – विनोद कुमार, कारोबारी

खुले में लगे हैं कूड़े के ढेर
शहर में कूड़ा समय से नहीं उठता। कूड़ा एकत्रीकरण की दोहरी प्रणाली के कारण समय से डंपर भी नहीं उठते। क्षेत्र में खुले में भी कूड़े के ढेर लगे हैं। – कर्ण गुप्ता, सब्जी विक्रेता

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