अमर उजाला अलर्ट : खनन से तबाही मचा सकती है ज्यूणी खड्ड

गोहर (मंडी)। उपमंडल में बहने वाली विशाल ज्यूणी खड्ड में हो रहा अवैध खनन बरसात में किसी बड़ी तबाही को अंजाम दे सकता है। इस संदर्भ में सरकार, प्रशासन और क्षेत्र की जनता अनभिज्ञ दिखाई पड़ते हैं। हर साल ज्यूणी खड्ड बरसात में उफान पर रहती है। पिछले कई दशकों से हो रहा अवैध खनन खड्ड का रुख बदल रहा है।
धंग्यारा, जाच्छ, बैहरी, नौण, गोहर, स्यांज, छपराहण से लेकर पंडोह तक ज्यूणी खड्ड फैली हुई है। पंडोह में ज्यूणी खड्ड ब्यास नदी में मिल जाती है। धंग्यारा से पंडोह तक अनेक स्थानों पर ज्यूणी खड्ड को लोग अपनी जरूरत और आजीविका के लिए इसका बेरहमी से दोहन कर रहे हैं। खड्ड के तटीय भाग में सैकड़ों लोग बसे हैं। भारी बरसात में जहल धंग्यारा से पंडोह तक खड्ड कोहराम मचा सकती है। साथ ही जाच्छ और गोहर कस्बे में तो ज्यूणी खड्ड कहर बरपा सकती है। खड्ड के आसपास कांढी कमरूनाग, जहल, धिश्ती, तुना, शाला, नौण, गोहर, स्यांज, छपराहण और आसपास की अनेक पंचायतों के हजारों लोग जीवन यापन करते हैं। तुना पंचायत के पूर्व प्रधान काहन सिंह ठाकुर का कहना है कि आज तक के इतिहास में ज्यूणी खड्ड में कोई भी प्रलय नहीं आई है। मगर खड्ड में हो रहा अवैध खनन बेहद चिंता का विषय है। बानीसेरी निवासी मस्त राम ठाकुर का कहना है कि खड्ड के तटीय भू-भागों में जीवन यापन करने वाले लोगों को बरसात में अलर्ट रहने की जरूरत है। जाच्छ के टेकेंद्र राणा और हरि सिंह ठाकुर का कहना है कि लोगों को बरसात में ज्यूणी खड्ड के किनारे रहते हुए दहशत होने लगी है। गोहर पंचायत प्रधान अमृत लाल, स्यांज पंचायत प्रधान भोला दत्त और छपराहण पंचायत के पूर्व प्रधान वेद प्रकाश गुप्ता का कहना है कि अवैध खनन ज्यूणी खड्ड के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। एक सप्ताह पहले बरसात की शुरुआत में ही बगस्याड़ के समीप बादल फटने की घटना हो चुकी है। जिससे जबाल खड्ड पर पुल बह गया। प्रशासन ने भी बादल फटने से करीब दो करोड़ नुकसान आंका है।

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