
बिलासपुर। बरसात का सीजन शुरू होते ही जल जनित रोगों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। पिछले साल की अपेक्षा जिला में इस तरह के मरीजों की संख्या काफी कम है। न ही किसी विशेष स्थान में बीमारी फैलने की अभी तक सूचना आई है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। जल जनित रोगों से बचाव एवं रोकथाम के लिए विभाग ने तमाम बंदोबस्त कर दिए हैं। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विशेष तौर पर ट्रेंड किया जा रहा है। इन महिलाओं को डायरिया से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
बरसात में जल स्रोतों के प्रदूषित होने से पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, हैजा, आंत्रशोथ और कृमि संक्रमण जैसी बीमारियां फैलने की आशंका रहती है। बरसात में इन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इस साले इसक लिए विभाग ने कारगर कदम उठाए हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों तक क्लोरीन की गोलियां उपलब्ध करवा दी गई है। विभाग ने पारंपरिक जल स्रोतों और कुओं-बावड़ियों के पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर डालने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरआर भारद्वाज ने कहा कि ब्लीचिंग पाउडर आईपीएच के कनिष्ठ अभियंताओं से लिया जा सकता है। घरेलू स्तर पर भी 15 से 20 लीटर पानी में क्लोरीन की एक गोली डालनी चाहिए। यह गोलियां भी अस्पतालों में उपलब्ध है। डायरिया से निपटने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की महिलाओं को विशेष तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसके लिए 4 से 12 जुलाई तक विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में एक-एक दिन की ट्रेनिंग रखी गई है। इस ट्रेनिंग में महिलाओं को डायरिया के दौरान मरीजों को दिए जाने वाले ओआरएस के घोल और अन्य पहलुओं की विस्तार से जानकारी प्रदान की जाएगी।
