
चंबा। जिला के एक पुलिस थाना समेत दो चौकियों को एनएचपीसी ने आर्थिक मदद देने से हाथ खींच लिए हैं। अब इन चौकियों को बनाए रखने को लेकर पुलिस विभाग में माथापच्ची चल रही है। जिला के खैरी थाना सहित पुलिस चौकी चौड़ा और सुरंगानी के स्टाफ का खर्चा एनएचपीसी उठाता था। शुरू में जब एनएचपीसी के प्रोजेक्टों का कार्य चल रहा था, तो निगम ने पुलिस से कानून-व्यवस्था के लिए इनका खर्च उठाने की पेशकश की थी। अब निगम के प्राजेक्टों का काम पूरा हो चुका है और यहां की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने संभाल लिया है। ऐसे में एनएचपीसी के लिए एक थाना और दो पुलिस चौकियों का खर्च उठाना बोझ बन गया है। इसे देखते हुए एनएचपीसी ने पुलिस के अधिकारियों को अवगत करवा दिया है कि सीआईएसएफ की सुरक्षा मिलने के चलते अब उसे पुलिस की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। लिहाजा अब वह पुलिस का खर्चा नहीं उठाएगा। उधर, पुलिस विभाग को जुलाई 2010 के बाद से लेकर 31 मार्च 2012 की तीन करोड़, 15 लाख 73 हजार 951 रुपये की पेमेंट भी एनएचपीसी ने नहीं दी है। इसको लेकर दोनों में कागजी कार्रवाई चल रही है। इस संबंध में एसपी बीएम शर्मा ने बताया कि उच्च अधिकारियों की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी, भेज दी गई है। उन्होंने बताया कि अभी इन्हें हटाने का कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने माना कि एनएचपीसी ने विभाग की 3.15 करोड़ के करीब की बकाया राशि का भुगतान भी नहीं किया है।
इतने पुलिसकर्मी तैनात हैं यहां पर
पुलिस के अनुसार खैरी थाना में एक इंस्पेक्टर, एक एएसआई, चार हैड कांस्टेबल और 13 कांस्टेबल तैनात हैं। वहीं, इस थाने के तहत चौड़ा पुलिस चौकी में एक एएसआई, एक हैड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल तैनात हैं। इसी तरह किहार थाना के तहत सुरंगानी पुलिस पोस्ट में एक एएसआई, एक हैड कांस्टेबल और छह कांस्टेबल तैनात हैं। इस सारे स्टाफ का खर्च एनएचपीसी उठा रहा था। एनएचपीसी के हाथ खींच लेने के बाद से इनके वेतन और अन्य खर्चों का बोझ अब प्रदेश सरकार पर आ गया है। फिलहाल यह मामला ऊपरी लेबल पर लंबित चल रहा है।
रिव्यू के बाद लिया जाएगा निर्णय
आईजी नार्थ रेंज राकेश अग्रवाल ने बताया कि खैरी थाना और अन्य दो पुलिस चौकियों की स्थापना एनएचपीसी के प्राजेक्टों के लिए की गई थी। उस समय इनका मकसद आम जनता के क्राइम से नहीं जुड़ा हुआ था। अब एनएचपीसी के निर्णय के बाद पुलिस इनकी आम जनता से जुडे़ क्राइम में उपयोगिता का अध्ययन कर रही है। इसके लिए इनके क्राइम रेट का डाटा मंगवाया गया है। इसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा कि इन्हें बंद करना है या फिर बहाल रखना है।
