
रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ, केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग, रुद्रप्रयाग-दुर्गाधार-बावईं-तिलवाड़ा मोटर मार्ग, मयाली-पांजणा-बसुकेदार-गुप्तकाशी और बांसवाड़ा-मोहनखाल आदि मोटर मार्गों पर इन दिनों लगभग एक जैसी स्थिति है। सड़क किनारे लोगों की भीड़ और किसी वाहन पर बैनर लगा देख उसे रोककर जबरन सामान लेने की कोशिश।
यह स्थिति कुछ स्वैच्छिक संगठनों द्वारा रोड हेड पर स्थित गांवों में राहत सामग्री वितरित करने की वजह से पैदा हो रही है। केदारघाटी में आपदा आने के बाद लोगों ने खुले हाथ से मदद पहुंचाई, लेकिन कुछ लोगों ने इसे सड़क पर ही बंटवा दिया। यह मदद प्रभावित क्षेत्रों तक ही नहीं पहुंची। मनमर्जी से ऐसे क्षेत्रों में राहत सामग्री बांट दी गई, जहां प्रभावित नहीं हैं। बच्चों को रास्तों में बिस्कुट के पैकेट थमा दिए गए। मयाली-गुप्तकाशी के बीच राहत सामग्री लेकर आ रहे ट्रकों को रोक दे रहे हैं। यह भी शिकायत मिल रही है कि एनजीओ से किसी नेता ने यह कहकर सामग्री अपने पास रखवा ली है कि मैं बंटवा दूंगा, लेकिन माल अभी नेता जी के घर में डंप है।
सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह कंडारी का कहना है कि सरकारी और गैर सरकारी स्रोत से प्राप्त राहत सामग्री को सरकारी दुकानों के माध्यम से वितरित कराया जाना चाहिए। इससे जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंच पाएगी।
सड़क ध्वस्त होने से दिक्कत
रुद्रप्रयाग। आपदा राहत सामग्री पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा रोड कनेक्टिविटी का ध्वस्त होना है। रुद्रप्रयाग से तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि से कुंड, कुंड से गुप्तकाशी, गुप्तकाशी से जाल और कुंड से ऊखीमठ मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त होने से राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। चॉपर से पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। यदि गुप्तकाशी-विद्यापीठ-ऊखीमठ मोटर मार्ग खुल जाता, तो गुप्तकाशी और ऊखीमठ का सीधा संपर्क हो जाता और राहत सामग्री वितरण में तेजी आती है।
आपदा पीड़ितों को आई कार्ड जारी
रुद्रप्रयाग। वास्तविक प्रभावितों तक राहत पहुंचे, इसके लिए प्रशासन ने आई कार्ड जारी किए हैं। इसी के आधार पर अगस्त्यमुनि के प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री दी जा रही है। एसडीएम सदर डा. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में छाता, कंबल, टार्च, आटा, चावल, दाल, चीनी, नमक और बर्तन दिए जा रहे हैं। इसके अलावा पानी को साफ करने के लिए सात हजार क्लोरीन की गोली भी वितरित की गई हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग प्रभावित नहीं है, उनको सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से दो माह का राशन खरीदने के लिए कहा गया है।
बिजली ने किया दु:खी
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी के औंरिंग, पैलिंग, जलईं, धार, सुरसाल, कालीमठ घाटी, फाटा, गौरीकुंड, सोनप्रयाग, रांसी सहित कई गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप है। वहीं लमगौंडी और फली फसालत सहित कुछ इलाकों में कुछ ही घंटे विद्युत आपूर्ति हो रही है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों का मोबाइल फोन पर संपर्क करना मुश्किल हो गया है, जिससे वे एक-दूसरे की कुशल क्षेम नहीं पूछ पा रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारी का इंतजार
रुद्रप्रयाग। प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व उपनिरीक्षक पहुंचे, लेकिन उन्होंने प्रभावित घरों का दौरा करने के बजाय एक ही स्थान पर बैठ कर रिपोर्ट बना दी। उक्रांद नेता और फली फसालत गांव के निवासी विष्णुकांत शुक्ला ने बताया कि गांव में अभी तक कोई जिम्मेदार अधिकारी प्रभावित लोगों का हाल चाल पूछने नहीं आया। केदारनाथ में आई आपदा में गांव के कई लोग मारे गए हैं। यदि कोई बड़ा अधिकारी आता, तो उसको अपना दु:ख दर्द बताते, लेकिन अधिकारी चॉपर से ही आवाजाही कर रहे हैं।
केदारनाथ पैदल मार्ग ध्वस्त
रुद्रप्रयाग। गौरीकुंड से केदारनाथ तक 14 किमी पैदल मार्ग लगभग पूरी तरह तबाह हो चुका है। यहां पर फिलहाल आवागमन होना मुश्किल है। रामबाड़ा के ऊपर चट्टानों में बच्चों के शव अटके हुए हैं। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि बड़ी मुश्किल से लोगों को नीचे लाए हैं। ऐसे में यदि कोई पैदल मार्ग पर जाता है, तो सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक होगा।
