
रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को अगस्त्यमुनि से गुप्तकाशी तक खोलना बीआरओ के लिए चुनौती बन गया है। मंदाकिनी नदी की बाढ़ कई स्थानों पर सड़क निगल गई है। जहां सड़क थी, वहां नदी बह रही है। कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां हिल कटिंग कर सड़क बनाने लायक जगह भी नहीं बची है। ऐसे में नदी की धारा को डायवर्ट करना ही विकल्प बचा है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) ने अगस्त्यमुनि नगर पंचायत क्षेत्र के पुराना देवल मोहल्ले में इस पर काम भी शुरू कर दिया है।
16-17 जून को मंदाकिनी नदी की बाढ़ में केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग नौला पानी, गंगतल, रामपुर, सिल्ली, चंद्रापुरी, स्यालसौड़, भीरी, कुंड, सोनप्रयाग, मुंडकटिया और गौरीकुंड का कई किमी हिस्सा बह गया है। वर्तमान में बीआरओ ने तिलवाड़ा से अगस्त्यमुनि के बीच नदी तट से मार्ग को आवाजाही के लिए खोल दिया है। सबसे अधिक दिक्कत विजयनगर बाजार से पुराना देवल के बीच 700 मीटर पैच में हैं। यहां नदी पुराने प्रवाह क्षेत्र से करीब 300 मीटर अंदर की ओर बह रही है। नदी के कटाव से लगभग 500 मीटर ऊपर तक के मकान भी ध्वस्त हो गए हैं। ऐसे में यहां हिल कटिंग कर सड़क निर्माण का विकल्प भी नहीं बचा है। इससे आगे चंद्रापुरी-गबनीगांव में भी 500 मीटर सड़क का नामोनिशान मिट चुका है। कुंड से आगे गुप्तकाशी की ओर सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना के बैराज स्थल पर भी नवनिर्मित 300 मीटर रोड पानी में बह गई है।
राजमार्ग खुलते ही मिलती राह
यदि केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग खुल जाता, तो जिला मुख्यालय का गुप्तकाशी से सीधा संपर्क हो जाता। वर्तमान में 45 किमी दूर गुप्तकाशी की दूरी 130 किमी है। यही स्थिति ऊखीमठ की है। ब्लाक मुख्यालय ऊखीमठ जाने के लिए चमोली-गोपेश्वर-चोपता मोटर मार्ग से होकर जाना पड़ रहा है। राजमार्ग के खुलने से चॉपर के बजाय सड़क मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों के निकटवर्ती स्थानों में राहत सामग्री पहुंचती। लोगों को अस्पताल या रोजमर्रा की सामग्री लेने के लिए कई किमी पैदल नहीं चलना पड़ता। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले लिंक मोटर मार्गों पर भी यातायात शुरू हो जाता।
पुराना देवल में मशीन को नदी में उतार दिया गया है। सड़क बनाने के लिए नदी की दिशा को मोड़ना जरूरी है। नदी की दूसरी ओर से प्रवाहित हो रहे स्थान पर फीलिंग की जाएगी। इससे नदी पुराने स्थान पर लौट आएगी और सड़क के लिए स्थान मिल जाएगा। चंद्रापुरी और स्यालसौड़ में फिलहाल कटिंग का विकल्प है। खराब मौसम सड़क खोलने में दिक्कत कर रहा है। -मुकेश कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी बीआरओ
